Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
भूकंप से मरने वालों की संख्या सत्रह सौ के पार Sangli Suicide Case: युवक ने की आत्महत्या, मां का गंभीर आरोप- 'धर्म परिवर्तन के दबाव में बेटे की ली ... IND vs ENG 1st T20I: इंग्लैंड के खिलाफ भिड़ंत के लिए तैयार भारत, क्या वैभव सूर्यवंशी का होगा डेब्यू? Toxic Teaser: 'टॉक्सिक' के नए टीजर में यश की गर्ल गैंग का भौकाल, नयनतारा और कियारा का दिखा खूंखार अं... Israel-USA Tensions: अमेरिकी मदद ठुकराएंगे नेतन्याहू, कहा- 'हमारी अर्थव्यवस्था अब विदेशी सहायता की म... ATF Price Cut: हवाई यात्रा होगी सस्ती! जेट फ्यूल के दाम में 5 रुपये की भारी कटौती Yusuf Imran: गूगल छोड़कर शुरू किया अपना AI बिजनेस, जानें क्यों करोड़ों की सैलरी को दी मात? Dreamcatcher Vastu Tips: घर में ड्रीमकैचर लगाने के फायदे, जानें सही दिशा और वास्तु के नियम Future of Healthcare in India: बदलती जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों के बीच हेल्थकेयर का नया स्वरूप Ketan Agarwal Murder Case: मर्डर का मजाक उड़ाना पड़ा महंगा, डेंटिस्ट डॉ. मुस्कान सोनी 5 साल के लिए सस्...

दिल की बातें दिल ही जानें.. .. ..

दिल में बहुत सारे लोग जानते थे कि क्या होने वाला है। इसके बाद भी मन की बात को काटने की हिम्मत किसे थी। बेचारे छात्रों ने बात नहीं सुनी तो शो कॉज हो गया। अब मन की बात पर लोगों के यानी देश के मैंगो मैन के दिल की बात भारी पड़ने लगी है क्या, यह लाख नहीं करोड़ टके का सवाल है।

इस बार गाड़ी कुछ ऐसी पटरी से उतरी कि मोदी जी का बजरंग बली का नारा भी माहौल बदल नहीं पाया। जी हां मैं कर्नाटक के विधानसभा चुनाव की बात कर रहा हूं। माहौल बनाने की पूरी कोशिश के बाद भी जनता ने अपने दिल की बात सुनी यानी जिन मुद्दों पर अपने मोदी जी बात करने से अब कतराते हैं, वही सारे मुद्दे भाजपा के खिलाफ चले गये।

मानना पड़ेगा राहुल गांधी को जिसने एक सवाल संसद के अंदर उठाने के बाद पूरा माहौल ही गर्दा गर्दा कर दिया है। लाख कोशिशों के बाद भी इन मुद्दों पर से जनता का ध्यान वे बंटा नहीं पा रहे हैं, जो अच्छे दिनों का वादा करके दिल्ली की गद्दी पर आये थे।

लोग अगर भूल गये हों तो याद दिला देता हूं कि श्री मोदी के जबर्दस्त चुनाव प्रचार की शुरुआत में भाजपा की तरफ से एक गीत बजाया गया था। गीत था अच्छे दिन आने वाले हैं। इसके जरिए उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति में सुधार करके और विकास के माध्यम से देश के लोगों को बेहतर दिनों की उम्मीद दी थी।

इसके अलावा सबका साथ, सबका विकास मंत्र को अपने नेतृत्व में सरकार चलाने का मूल मंत्र बनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी वर्गों, समुदायों और धर्मों के लोगों के साथ मिलकर देश के विकास में लगेंगे। वैसे मोदी जी ने यह भी कहा था कि दिल्ली को झाड़ू लगाने वाला चाहिए। यह अलग बात है कि अब दिल्ली में दूसरी पार्टी झाड़ू लेकर हाजिर हो चुकी है।

इसी  बात पर एक पुरानी फिल्म की गीत याद आने लगा है। वर्ष 1972 में बनी थी फिल्म, नाम था रुप तेरा मस्ताना। इस फिल्म में जीतेंद्र और मुमताज मुख्य भूमिका में थे। जिस गीत की याद आ रही है, उसे लिखा था असद भोपाली ने और संगीत में ढाला था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी ने। इसे लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

दिल की बातें दिल ही जाने
नाजुक नाजुक प्यारे प्यारे वाडे हैं इरादे हैं
आ आ मिलके दामन दामन से बाँध ले
आ आमिलके दामन दामन से बाँध ले
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल की बातें दिल ही जाने
नाजुक नाजुक प्यारे प्यारे वाडे हैं इरादे हैं
आ आमिलके दामन दामन से बाँध ले
आ आ मिलके दामन दामन से बाँध ले
दिल की बातें दिल ही जाने
तू हंस पडी या फुलझडी छुटी कहीं
धड़कन बढ़ी इक शोला सा लहरा गया
हा हा यह नूर होगा तेरी आँखों में प्यार का
या नग़मा गूंजा होगा बहार का
दिल की बातें दिल ही जाने
नाजुक नाजुक प्यारे प्यारे वाडे हैं इरादे हैं
आ आमिलके दामन दामन से बाँध ले
आ आमिलके दामन दामन से बाँध ले
दिल की बातें दिल ही जाने
तू जो कहे मै वह कहु साया बनु संग संग राहु
तू और मै अब्ब एक हैं
आ आ मै गीत बन तेरे होंठ चूम लू
आ सपना बनके इन् आँखों में झूम लूँ
दिल की बातें दिल ही जाने
नाजुक नाजुक प्यारे प्यारे वाडे हैं इरादे हैं
आ आ मिलके दामन दामन से बाँध ले
आ आ मिलके दामन दामन से बाँध ले
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल की बातें दिल ही जाने

फिर भी कउनो कनफ्यूजन में मत रहिए। आज भी देश के सबसे लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी ही हैं। जो लोग कर्नाटक के बाद दिल्ली की गद्दी पर कब्जा जमाने की बात कर रहे हैं, वे खुद कमजोर जमीन पर खड़े हैं और व्यक्तिगत तौर पर नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ दूसरे नेताओं के बहुत ऊपर है।

अब दिल की बात में अपने नीतीश भइया को भी देख लीजिए। दरवाजे दरवाजे घूम कर भाजपा विरोधी मोर्चा बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। कितनी सफलता मिलेगी, यह तय नहीं है। इसके बीच लोग इस बात को भूल रहे हैं कि उनके करीबी हरिवंश आज भी राज्यसभा के उप सभापति हैं जबकि कभी बहुत करीबी रहे आरसीपी सिंह ने खेमा बदल कर लिया है। इसलिए वह आगे क्या करेंगे, इस पर जो ऑपोजिशन के लोगों को भी संदेह होना लाजिमी है।

वैसे यह बात समझ में नहीं आयी कि गुजरात में झाड़ू लेकर कांग्रेस का वोट काटने वाले केजरीवाल ने इस बार कर्नाटक में अभियान क्यों नहीं चलाया। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद वे आक्रामक बैटिंग करने की मुद्रा में हैं। महिला पहलवानों का समर्थन कर वह हरियाणा में जमीन बना रहे हैं, यह स्पष्ट है। इसलिए किसके दिल की बात क्या है, यह बाद की बात है।