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दिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी ने शांति समझौता किया

  • पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बहुत अच्छी खबर: मोदी

  • तीन पक्षों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किया गया

  • समारोह में गृह मंत्री अमित शाह मौजूद

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: असम में उग्रवाद जल्द खत्म होने की उम्मीद बंध गई है। दरअसल गुरुवार को केंद्र सरकार, असम सरकार और उग्रवादी संगठन दिमासा नेशनल लिब्रेशन आर्मी  दिमासा पीपल्स सुप्रीम काउंसिल  के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ। इस समझौते के तहत उग्रवादी संगठन हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे।

इसके साथ ही माना जा रहा है कि असम में उग्रवाद का अंत हो जाएगा। वहीं समझौते के बाद आज ऐहतियातन दिमा हसाओ जिले में धारा 144 लागू की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। समझौते के तहत दिमासा नेशनल लिब्रेशन आर्मी के 168 से ज्यादा कैडर हथियार डालेंगे और मुख्यधारा में शामिल होंगे।

समझौते के तहत असम सरकार द्वारा दिमासा वेलफेयर काउंसिल का गठन किया जाएगा, जो दिमासा लोगों के सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषाई, राजनीतिक, आर्थिक और शिक्षा का संरक्षण करेगी। साथ ही दिमासा लोगों के लिए तेजी से विकास किया जाएगा। समझौते के तहत संविधान के छठे शेड्यूल के पैराग्राफ 14 के तहत एक कमीशन का गठन किया जाएगा, जो इस बात की जांच करेगा कि नॉर्थ चाचर हिल्स ऑटोनोमस काउंसिल  के कुछ गांवों को दिमासा काउंसिल में शामिल किया जा सकता है या नहीं।

बता दें कि इसकी मांग की जा रही है।समझौते के तहत केंद्र और असम सरकार आत्मसमर्पण करने वाले कैडर के पुनर्वास के लिए कदम उठाएंगी। केंद्र और राज्य सरकार 500-500 करोड़ रुपए देकर एक विशेष डेवलेपमेंट पैकेज बनाएंगी, जो अगले पांच साल में एनसीएचएसी और राज्य के अन्य हिस्सों में रहने वाले दिमासा लोगों की भलाई के लिए खर्च किए जाएंगे। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा और गृह मंत्रालय के कुछ शीर्ष अधिकारी समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान मौजूद रहे।

बता दें कि केंद्र सरकार, असम सरकार और दिमासा नेशनल लिब्रेशन आर्मी के बीच समझौते पर हस्ताक्षर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुए। वहीं शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुशी जाहिर की और कहा कि इससे 2024 तक उत्तर पूर्व उग्रवाद मुक्त होने में मदद मिलेगी और उत्तर पूर्व में शांति और समृद्धि आएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के दीमा हसाओ जिले में सक्रिय जनजातीय उग्रवादी समूह दिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी (डीएनएलए) के हिंसा छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने के फैसले को पूर्वोत्तर में शांति और प्रगति के लिए बहुत अच्छी खबर बताया। इस संबंध में शाह की ओर से किए गए एक ट्वीट के जवाब में मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर की प्रगति और शांति के लिए यह बहुत अच्छी खबर है।