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जल, जंगल और जमीन की लूट के खिलाफ आंदोलन- भुवनेश्वर मेहता

रांचीः राज्य में विस्थापन का मुद्दा बढता जा रहा है लेकिन  राज्य  सरकार भी इस मुद्दे के प्रति उदासीन है। झारखंड में विस्थापन का तीसरा दौर शुरू हो गया है। जब से कार्पोरेट परस्त भाजपा की मोदी सरकार ने कोयला खनन का काम निजी खिलाड़ियों के हवाले करना शुरू किया है स्थानीय प्रशासन, आउट सोर्सिंग कंपनी के गुंडे सारे नियम कानून को ताक पर रख कर और ग्रामसभा को दर किनार कर जबर्दस्ती भूमि अधिग्रहण का काम कर रहे हैं।

ताजा मामला हजारीबाग जिले में अडानी इंटरप्राइजेज को आवंटित गोंदलपुरा कोयला खदान का है जहां  जिला प्रशासन द्वारा बुलाई गई जन सुनवाई में ग्रामीणों के प्रचंड बहुमत ने कोयला खदान के लिए जमीन दिए जाने से इंकार कर दिया। जिसके बाद अडानी इंटरप्राइजेज के लोगों ने पुलिस प्रशासन को मैनेज कर किसानों और रैयतों पर झुठा मुकदमा दर्ज कर उन्हें परेशान किए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

यह बात आज वामदलों और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए सीपीआई के पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कही। बैठक को संबोधित करते हुए माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की थी की राज्य में जल्द विस्थापित आयोग का गठन किया जाएगा और एक समय सीमा के अंदर विस्थापितों की समस्याओं का निदान किया जाएगा लेकिन यह काम अभी तक लंबित है।

जद (यू) के वरीय नेता गौतम सागर राणा ने कहा कि विस्थापन के सवाल पर वे संयुक्त आंदोलन के साथ हैं। राजद के उपाध्यक्ष राजेश यादव ने कहा कि विस्थापित आयोग की मांग पर आंदोलन को तेज किया जाना चाहिए। एक्टिविस्ट और विस्थापन पर शोध कर रही वासवी ने कहा कि झारखंड मे जितने भी विस्थापन विरोधी आंदोलन चल रहें हैं उनकी एक संयुक्त बैठक कर समन्वय बनाया जाए।

सीपीआई के राज्य सचिव महेंद्र पाठक ने विस्थापन विरोधी सभी संगठनों, किसान संगठनों, आदिवासी संगठनों को भी विस्थापन विरोधी संयुक्त आदोलन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।मासस के शुसांत मुखर्जी ने विस्थापन के खिलाफ लड़ाई को लगातार चलाने की आवश्यकता बताई।

बैठक में अन्य लोगों के अलावा सीपीआई के अजय सिंह, अनिरुद्ध, अडानी इंटर प्राईजेज के खिलाफ लड़ रहे ग्रामीणों के प्रतिनिधि श्रीकांत निराला, मुखिया,इलियास अंसारी, मुखिया,  योगेश्वर महतो ने भी भाग लिया।

संयुक्त बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए  वाम और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के नेताओं ने विस्थापन के खिलाफ आगामी चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की जिसमें 7 मई को  हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड में  अवस्थित गोंदलपुरा कोयला खदान  जो अडानी इंटरप्राइजेज को आवंटित  किया गया है को रद्द किये जाने की मांग को लेकर  आंदोलन कर रहे किसानों से मिलने, झारखंड में जहां – जहां विस्थापितों के संगठन आंदोलन कर रहे हैं उनको चिन्हित कर मई महीने में उनकी संयुक्त बैठक आयोजित करने, जुन के अंतिम सप्ताह में एक राज्य स्तरीय कंवेंशन किए जाने और इस वर्ष के अंत मे राजधानी मे एक बड़ी रैली किए जाने  का एलान किया गया।