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क्रेडिस स्विस ने भी अडाणी को औकात घटा दी

  • कर्ज लेने के लिए अडाणी के बॉंड्स का भाव शून्य

  • सेबी की तरफ से अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

  • अडाणी ने भी अपना एफपीओ वापस ले लिया है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अडाणी समूह पर भारत सरकार की एजेंसियों ने चुप्पी साध रखी है। आम तौर पर ऐसी खबरें सामने आने के बाद शेयर बाजार पर नजर रखने वाली सेबी तुरंत हरकत में आती है। इसी सेबी ने सहारा सहित कई प्रमुख घरानों के खिलाफ आनन फानन में कार्रवाई की थी लेकिन अडाणी के खिलाफ रिपोर्ट आने तथा शेयर बाजार के भूचाल के बाद भी सेबी की तरफ से कोई पहल नहीं हुई है।

वैसे भारतीय एजेंसियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद भी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने हिंडेनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है। इसी कारण स्विस ऋणदाता की निजी बैंकिंग शाखा ने अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन, अदाणी ग्रीन एनर्जी और अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड द्वारा बेचे गए नोटों के लिए शून्य उधार मूल्य निर्धारित किया है।

स्विट्जरलैंड स्थित निवेश बैंकिंग कंपनी क्रेडिट सुइस ने अपने निजी बैंकिंग ग्राहकों को मार्जिन लोन के लिए जमानत के रूप में अदाणी समूह के बॉन्ड स्वीकार करना बंद कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा धोखाधड़ी के आरोपों के बाद अरबपति गौतम अदाणी के वित्त की जांच बढ़ रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्विस ऋणदाता की निजी बैंकिंग शाखा ने अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन, अदाणी ग्रीन एनर्जी और अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड द्वारा बेचे गए नोटों के लिए शून्य उधार मूल्य निर्धारित किया है।

हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कई अन्य बैंकों ने अदाणी समूह को कर्ज देना जारी रखा हुआ है। कम से कम दो यूरोपीय निजी बैंकों ने अब तक अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है।

जबकि एक निवेश फर्म ने अदाणी पोर्ट्स को डॉलर बॉन्ड के एवज में 75% से 80% के बीच उधार देने की पेशकश की है। जब कोई निजी बैंक किसी कंपनी के बॉन्ड्स की लैंडिंग वैल्यू शून्य कर देता है तो संबंधित कंपनी को ऋण जारी रखने के लिए नकद के साथ टॉपअप करना पड़ता है।

कंपनी को दूसरे विकल्प के तहत दूसरे कॉलेटरल मुहैया कराने होते हैं। अगर वह ऐसा नहीं कर पाता है तो कंपनी की सिक्योरिटीज जब्त कर की जा सकती है। बता दें कि अदाणी समूह पर बाजार में उस समय हड़कंप मच गया जब हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि समूह ने राजस्व और स्टॉक की कीमतों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है।

आरोपों के बाद से समूह के बॉन्ड रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के एफपीओ को वर्तमान शेयरधारकों और संस्थागत निवेशकों का समर्थन मिलने से समूह अपने नुकसान में कुछ हद तक भरपाई कर चुका है।

लेकिन बाद में कंपनी ने इस एफपीओ को भी वापस लेते हुए निवेशकों के पैसे लौटाने का एलान कर दिया है। क्रेडिट सुइस की कार्रवाई के बाद फोर्ब्स की लिस्ट के अनुसार दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में गौतम अदाणी 15वें नंबर पर पहुंच गए हैं।