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बाजार में जबर्दस्त नुकसान और अडाणी की सफाई

एक पुरानी कहावत है कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है जो आस पास की जमीन कांपती है। शेयर बाजार में अडाणी के शेयरों के भाव गिरने से कुछ ऐसा ही हो रहा है। शेयर बाजार में अडाणी की कंपनी के भरोसे मुनाफा कमाने की सोच रखने वालों ने अब तक करीब 3.37 लाख करोड़ रुपये का नुकसान अडाणी की कंपनी को हो चुका है।

शेयर बाजार में पूंजी निवेश करने वाले निवेशकों का आंकड़ा देखें तो दो दिन में उन्हें भी 11 लाख करोड़ के करीब का नुकसान हो चुका है। इससे साफ है कि यह सूनामी अभी जारी रह सकती है। इसके बीच ही अडाणी की तरफ से हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए चुनौती दी है।

अडाणी की कंपनी की तरफ से 413 पन्नों का बयान जारी किया गया है। अमेरिकी रिसर्च एजेंसी की रिपोर्ट को कंपनी ने भारत के खिलाफ साजिश बताते हुए कहा है कि खास योजना के तहत ही यह रिपोर्ट जारी की गयी है। यह सिर्फ अडाणी समूह पर हमला नही है बल्कि यह भारत के ऊपर हमला है।

रविवार की रात को जो बयान अडाणी की कंपनी की तरफ से जारी किया गया है, उसमें साफ किया गया है कि कंपनी ने भारतीय कानूनों को मानते हुए सारा कारोबार किया है। इस संबंध में कानूनी तथ्य भी इस स्पष्टीकरण में दिये गये हैं।

अडाणी समूह का आरोप है कि सिर्फ बाजार में नकली अस्थिरता पैदा करने के मकसद से इसे प्रचारित किया गया है। आरोप उस कंपनी की तरफ से लगाया गया है जो खुद ही शोर्ट सेलर यानी छोटा विक्रेता है। इसके जरिए हिंडेनबर्ग अपने लिए बाजार तैयार करने की साजिश कर रही है ताकि वह निवेशकों का पैसा अपनी तरफ आकर्षित कर सके। कंपनी ने सोच समझकर भारतीय शेयर बाजार को अस्थिर करने के लिए यह चाल चली है।

याद दिला दें कि गत 24 जनवरी को पहली बार हिंडेनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि अडाणी समूह ने शेयर बाजार में अपने भाव और संपत्ति के विवरणों की कारसाजी कर अनैतिक तरीके से पैसा कमाया है। रिपोर्ट के मुताबिक शेयर बाजार में अडाणी समूह की जो सात कंपनियां दर्ज हैं, उनका नकारात्मक विकास हो रहा है।

इस कारण दरअसल अडाणी समूह सिर्फ आंकडों की बाजीगरी कर खुद को बड़ा दिखाता आ रहा है जबकि उसकी वास्तविक पूंजी बहुत कम है। इस एक रिपोर्ट ने भारतीय शेयर बाजार में ऐसी हलचर मचा दी है कि निजी निवेशकों के साथ साथ भारतीय स्टेट बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम जैसी कंपनियों को भी खतरा हो गया है।

शेयर बाजार में अडाणी समूह के शेयरों के भाव गिरने की वजह से कंपनी की कुल पूंजी का आकलन भी तेजी से कम हुआ है। इसमें अडाणी ट्रांसमिशन, अडाणी टोटल गैस, अडाणी एंटरप्राइसेस, अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिस जोन, अडाणी पावर, अडाणी ग्रीन एनर्जी और अडाणी विलमर शामिल है।

चंद घंटों के अंदर ही इसका नतीजा यह निकला कि दुनिया के तीसरे सबसे अमीर आदमी से गौतम अडाणी नीचे उतरकर सातवें नंबर पर आ गये क्योंकि शेयर बाजार के भूचाल से कंपनी का धन लगातार कम होता चला गया। अब इससे अलग हटकर देखें तो अडाणी के साथ साथ भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम ने भी पैसे गंवाये हैं।

इन सरकारी कंपनियों ने अडाणी में काफी निवेश कर रखा है। ऐसे में शेयरों के भाव गिर रहे हैं तो नुकसान इन सरकारी निवेशकों को भी होने लगा है। न्यूनतम दर से भी नीचे चले जाने वाले शेयरों को मिलाकर कुल निवेशकों ने 11 लाख करोड़ रुपये दो दिनों में गवां दिये हैं. ऐसे में सरकारी एजेंसियों ने मजबूरी में अडाणी के कारोबार पर जांच प्रारंभ की है।

लेकिन इससे एक सवाल यह उभरकर आ रहा है कि ऐसी सूचनाएं तो पहले भी भारतीय स्तर पर उठती रही है। उस दौरान किसी सरकारी एजेंसी ने अडाणी के खिलाफ जांच करने की जरूरत नहीं समझी थी। अब अमेरिकी संस्था की रिपोर्ट जारी होने के बाद अचानक से भारतीय एजेंसियों को सक्रिय क्यों होना पड़ा, यह केंद्र सरकार के लिए नया सवाल है।

वैसे अपनी रिपोर्ट जारी करने के बाद हिंडेनबर्ग रिसर्च ने अडाणी समूह को यह चुनौती दे रखी है कि वह अमेरिकी अदालत में इस पर मुकदमा दायर कर सकते हैं क्योंकि दो साल के अनुसंधान और तथ्यों की पड़ताल करने के बाद ही यह रिपोर्ट जारी की गयी है।

इसलिए शेयर बाजार की इस अस्थिरता में आम जनता के लिए बड़ा सवाल यह है कि जनता का पैसा बैंकों और एलआईसी में जमा होने के बाद उसके नुकसान की भरपाई यह सरकारी कंपनियां कैसे करेंगे। इससे राहुल गांधी का वह सवाल उभरता है कि मोदी सरकार सिर्फ चंद पूंजीपतियों के फायदे के लिए सारे काम कर रही है और जनता को इससे नुकसान हो रहा है।