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पूर्वोत्तर के राज्यों में व्यापक हिंसा , बहुत सारे नेता गिरफ्तार

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: असम के छह जातीय समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग करने वाले मंच सोय जनगोष्ठी जौथा मंच ने आज यानी मंगलवार (15 नवंबर) को 12 घंटे का राज्यव्यापी बंद का आह्वान कर दिया है। मिली जानकारी के तहत निकाय छह जातीय समुदायों का एक छत्र संगठन है, जी हाँ और इसमें आदिवासी, चुटिया, कोच-राजबंशी, मटक, मोरन और ताई-अहोम शामिल है।असम के छह मूल समुदायों को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों के बंद के कारण कई व्यवसाय, सरकारी और निजी बस सेवाएं बंद रहीं।

बंद का ऊपरी असम के गोलाघाट, शिवसागर, नागांव और कई अन्य जिलों पर असर पड़ा और कई लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने के लिए सड़कों पर उतर आए और टायर भी जलाए। इस बंद के दौरान राज्यों में व्यापक हिंसा हो रही है। राज्य पुलिस ने कई नेताओं को गिरफ्तार किया है।इस मामले में फोरम ने दावा किया कि एसटी दर्जे की मांग लंबे समय से लंबित है और ना तो राज्य और न ही केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कोई उचित कदम उठाने को इच्छुक है। केवल यही नहीं बल्कि इसने राज्य और केंद्र की भाजपा सरकारों पर छह समुदायों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का भी आरोप तक लगाया है। इस मामले में समुदायों के नेताओं ने कहा कि उनके पास सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए बंद का आह्वान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

इसी के साथ छह समुदायों के छात्र संगठन ने 30 नवंबर को दिल्ली के जंतर मंतर में ह्यधरनाह्णकी भी योजना बनाई है और इस बीच, असम आदिवासी सन्मिलन (एएएस) ने मंगलवार को आदिवासी नायक बिरसा मुंडा की जयंती होने के मद्देनजर संयुक्त मंच से बंद के आह्वान को वापस लेने का आग्रह किया है। एएएस के महासचिव डेविड होरो ने कहा कि छह जातीय समूहों द्वारा उठाई गई मांगों पर हमारा पूरा समर्थन है।इस बीच, असम पुलिस ने 15 नवंबर को आॅल असम चुटिया स्टूडेंट्स यूनियन (एएसीएसयू) के अध्यक्ष महेन बोरा को गोलाघाट जिले में बंद के दौरान टायर जलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

सूत्रों के अनुसार बोरा के साथ पांच अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने सितंबर में पांच राज्यों छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश की एसटी सूचियों में विभिन्न समुदायों को शामिल करने की अनुमति दी थी। प्रभावित राज्यों ने उत्साहपूर्वक इस निर्णय को अपनाया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया था। हालांकि, इनमें छह असमिया जातीय समूह शामिल नहीं थे।