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कौन छिपा रहा है देश के दो हजार रुपये के नोट

  • दो हजार के नोटों का प्रचलन बहुत कम

  • सिक्कों का कारोबार भी अब घट चुका है

  • इस धन का कहीं तो भंडारण किया गया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः देश में डिजिटल करेंसी को जबर्दस्त समर्थन मिलने के बीच ही नकदी यानी नोटों का प्रचलन बाजार में कम होने का आंकड़ा भी सामने आया है। खास तौर पर यह समझा जा रहा है कि जो भारतीय रुपया अभी बाजार से गायब हैं, उनमें अधिकांश दो हजार रुपये के बड़े नोट हैं।

इसलिए इतनी अधिक मात्रा में धन को कौन और कहां जमा कर रहा है, यह सवाल केंद्र सरकार को परेशान कर सकता है। हाल के दीपावली में भी बाजार में इस नकदी यानी नोट के लेनदेन की कमी को महसूस किया गया था। दूसरी तरफ देश में पहली बार प्रयोग के तौर पर चालू की गयी डिजिटल करेंसी ने मात्र दो दिनों में ही 275 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है, यह सूचना भी बाहर आयी है।

भारतीय रिजर्व बैंक की इस योजना को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एचएसबीसी बैंक में आजमाया गया है। इन बैंकों के जरिए 48 बड़े लेनदेन की सूचना है, जिनका बाजार मूल्य 275 करोड़ रुपया है।

प्रयोग के दौरान ही इस सफलता के  बाद ऐसा माना जा रहा है कि आम जनता के लिए चालू होने के बाद यह डिजिटल मुद्रा और तेजी पकड़ेगी। लेकिन इसके बीच ही भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा छापे गये बड़े नोट कहां गायब हुए हैं, इस पर चिंता स्वाभाविक है।

दरअसल नरेंद्र मोदी द्वारा कालाधन वापस लाने का वादा कर नोटबंदी के बाद से ही कागज के बने नोटों को लेकर लगातार विशेषज्ञों का ध्यान लगा रहता है। इस बार की दीपावली के दौरान साढ़े सात हजार करोड़ के नोटों के बाजार में नहीं होने की सूचना कोई मामूली घटना नहीं है। इससे यह भी साबित होता है कि यह नोट आम आदमी के पास तो नहीं हैं वरना दीपावली ऐसा पर्व है, जिसमें आम आदमी धन अधिक खर्च करता है।

दूसरी तरफ यह दलील भी दी गयी है कि इस बार नकदी के बदले ऑनलाइन खरीद अधिक हुई है लेकिन यह सभी जानते हैं कि उस माध्यम से खरीद के लिए भी क्रेता के पास यानी उसके एकाउंट में धन का होना जरूरी है जो अब तक कागज के नोट ही हुआ करते थे। इनके बैंक में होने के बाद ही लोग ऑनलाइन खरीद किया करते थे।

फिर इतना सारा धन कहां चला गया, यह सवाल पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण बन चुका है। चिंता की बात इसलिए भी है कि पिछले बीस वर्षो में पहली बार ऐसा देखा गया है। ऐसी स्थिति तब है जबकि यह दावा किया गया है कि दो हजार रुपये मूल्य के नोटों की छपाई बंद नहीं की गयी है।