रोहतास सहित बिहार के कई जिलों में बहुत बेहतर काम किया
सासाराम के व्यापारी मुन्ना चौधरी अपहरण मामला चर्चित
गृह मंत्रालय ने सम्मान के लायक चुना है
अभी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात है
दीपक नौरंगी
पटनाः बिहार पुलिस के लिए गौरव की खबर है। राज्य के सात पुलिस अधिकारियों को वर्ष 2026 के केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक से सम्मानित किया गया है। सम्मानित होने वाले अधिकारियों में 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी आशीष भारती भी शामिल हैं। उन्हें यह सम्मान सासाराम के एक चर्चित अपहरण एवं फिरौती कांड के सफल अनुसंधान और अपराधियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाने में निभाई गई भूमिका के लिए दिया गया है।
सासाराम नगर (दरिगांव) थाना कांड संख्या 183/22 का यह मामला पुलिस के सामने बड़ी चुनौती बनकर आया था। अपराधियों ने एक व्यक्ति का अपहरण कर फिरौती की मांग की थी। ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती अपहृत की सुरक्षित वापसी और अपराधियों तक पहुंचना होती है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 72 घंटे के भीतर बिना फिरौती दिए अपहृत व्यक्ति को सकुशल बरामद कर लिया।
लेकिन पुलिस की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। मामले का अनुसंधान आगे बढ़ा और साक्ष्यों के आधार पर मजबूत अभियोजन तैयार किया गया। इसका परिणाम वर्ष 2025 में सामने आया, जब अदालत ने अंतरराज्यीय एवं अंतरजिला आपराधिक गिरोह के 10 सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। किसी अपहरण कांड में पीड़ित की सुरक्षित वापसी के साथ-साथ अपराधियों को अदालत से सजा दिलाना पुलिस अनुसंधान और अभियोजन की पूरी प्रक्रिया की सफलता को दर्शाता है।
इसी उपलब्धि को केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। दो हजार ग्यारह बैच के आईपीएस पदाधिकारी आशीष भारती ने अपने करियर में कई बेहतर कार्य किए जिससे कि हर जिले में जहां जहां उन्होंने सेवा दी है वहां के लोग उनके कार्यों से प्रभावित हैं जैसे कि मुंगेर, एसपी भागलपुर, एसएसपी फिर एसएसपी गया।फिर एसपी रोहतास, बेगूसराय के डीआईजी रहते हुए विधि व्यवस्था सहित अन्य गंभीर मामलों में उनकी बेहतर कार्यशैली देखी गई। बिहार कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी आशीष भारती वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस में उप-महानिरीक्षक के पद पर तैनात हैं।
आशीष भारती के अलावा बिहार के छह अन्य पुलिस पदाधिकारियों को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है। इनमें एसपी स्वीटी सहरावत, एएसपी दिनेश कुमार पाण्डेय, इंस्पेक्टर राजकिशोर कुमार, डीएसपी संतोष कुमार रॉय, इंस्पेक्टर धनंजय कुमार निर्दोष और दारोगा पंचम कुमार शामिल हैं। बिहार के सात पुलिस अधिकारियों को मिला यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि अपराध अनुसंधान, साक्ष्य संकलन और प्रभावी अभियोजन के महत्व को भी रेखांकित करता है। किसी भी आपराधिक घटना में गिरफ्तारी के साथ दोषियों को अदालत से सजा दिलाना ही पुलिस कार्रवाई की वास्तविक परिणति है। सासाराम का यह मामला इसी दिशा में एक उल्लेखनीय उदाहरण के रूप में सामने आया है।