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अजीब कूटनीतिक धर्मसंकट में फंसे है अमेरिकी राष्ट्रपति

ईरान से युद्ध या वेंस के जरिए समझौता वार्ता

वाशिंगटनः अमेरिका और ईरान के बीच पिछले आठ महीनों से जारी सशस्त्र संघर्ष इस समय एक बेहद संवेदनशील और नाजुक मोड़ पर आ पहुंचा है। वाशिंगटन और तेहरान दोनों ही पक्षों से लगातार आ रहे विरोधाभासी और कड़े संकेतों ने वैश्विक समुदाय के सामने यह असमंजस पैदा कर दिया है कि यह युद्ध आने वाले दिनों में दोबारा पूर्ण पैमाने पर विनाशकारी सैन्य हमलों की ओर बढ़ेगा या फिर किसी कूटनीतिक समझौते के जरिए इसका स्थायी समाधान निकलेगा। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि यह स्थिति भू-राजनीतिक स्थिरता के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

एक तरफ जहां अमेरिकी सैन्य तंत्र आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक मोर्चे पर सुलह की गुंजाइश भी तलाशी जा रही है। हाल ही में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान के रणनीतिक ठिकानों और सैन्य अड्डों पर नए सिरे से घातक हमले करने के तमाम संभावित विकल्पों पर एक विस्तृत ब्रीफिंग दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने आगामी 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के तुरंत बाद ईरान पर नए और व्यापक हमलों की एक संयुक्त सैन्य रणनीति तैयार कर ली है। इसी संभावित आक्रामकता के तहत, इसराइल, जॉर्डन, सऊदी अरब और कतर सहित पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य साजो-सामान, लड़ाकू विमानों और कार्गो जहाजों की तैनाती को भारी स्तर पर बढ़ा दिया गया है।

इसके बावजूद, अमेरिका पूरी तरह से कूटनीतिक रास्तों को बंद नहीं करना चाहता है। युद्ध की इन व्यापक तैयारियों के समानांतर वाशिंगटन गुप्त और प्रत्यक्ष दोनों माध्यमों से कूटनीतिक चैनलों का सक्रिय उपयोग कर रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कतर के अनुभवी मध्यस्थों के माध्यम से ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के शक्तिशाली सचिव मोहसिन रेजाई को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। इस प्रस्ताव के तहत, उपराष्ट्रपति वेंस ने ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम और इस आठ महीने पुराने युद्ध को समाप्त करने के लिए बिना किसी पूर्व शर्त के सीधे ‘टेबल टॉक’ या प्रत्यक्ष बातचीत की पेशकश की है, ताकि क्षेत्र में किसी भी प्रकार के बड़े सैन्य टकराव को टाला जा सके।

दूसरी ओर, तेहरान की तरफ से भी काफी सख्त और दो टूक प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान ने स्पष्ट शब्दों में यह संदेश दे दिया है कि वह किसी भी बाहरी सैन्य या आर्थिक दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सार्वजनिक रूप से जोर देकर कहा है कि दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की सार्थक प्रगति तभी संभव है जब अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान की सात प्रमुख और अनिवार्य शर्तों को पूरी तरह से स्वीकार करें। इन शर्तों में मुख्य रूप से ईरान पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाना, ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत समाप्त करना और विदेशी बैंकों में जब्त की गई अरबों डॉलर की ईरानी संपत्तियों को बिना शर्त बहाल करना शामिल है।