पोलैंड के संवैधानिक न्यायालय के नियंत्रण पर टकराव बढ़ा
वारसाः पोलैंड के संवैधानिक न्यायालय के नियंत्रण को लेकर सरकार और न्यायालय के शीर्ष न्यायाधीशों के बीच विवाद गहरा गया है, जिसके बाद न्यायालय परिसर में दंगा रोधी पुलिस तैनात कर दी गई है। यह विवाद वर्तमान प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार और पूर्ववर्ती दक्षिणपंथी लॉ एंड जस्टिस पार्टी के समर्थकों के बीच का है।
पुलिस की यह कार्रवाई तब हुई जब कानून मंत्री वाल्देमार ज़ुरेक ने न्यायालय के अध्यक्ष बोगदान श्वासकोव्स्की और उपाध्यक्ष बार्टलोमिए सोहांस्की की आपराधिक मुकदमे के तहत न्यायिक छूट (इम्यूनिटी) समाप्त करने का अनुरोध किया। टस्क सरकार ने न्यायपालिका को राजनीति से मुक्त करने का संकल्प दोहराया है। वारसॉ में न्यायालय परिसर के बाहर पीआईएस समर्थकों के विरोध प्रदर्शन के बीच टस्क ने सरकार के कदम का बचाव किया।
पीआईएस समर्थित राष्ट्रपति करोल नाव्रोकी डकार में आयोजित होने वाले यूथ ओलंपिक खेलों के लिए सेनेगल जा रहे थे, लेकिन वारसॉ में बढ़ते तनाव के कारण वे अपनी यात्रा बीच रास्ते से रद्द कर वापस लौट आए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को न्यायालय की इमारत में घुसने से रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी है।
संवैधानिक न्यायालय ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि दोनों वरिष्ठ न्यायाधीश कानूनी रूप से अपने पद पर बने हुए हैं और सरकार की इस कार्रवाई को तख्तापलट के अपराध के समान बताया। इसके जवाब में टस्क ने लिखा कि वर्षों की गैर-कानूनी व्यवस्था के बाद कानून का शासन बहाल करना एक कठिन लेकिन आवश्यक प्रक्रिया है।
वर्ष 2015 में सत्ता में आई पीआईएस सरकार ने अपने फैसलों को कानूनी रूप से सुरक्षित रखने के लिए न्यायालय में अपने समर्थित न्यायाधीशों की नियुक्ति की थी। हालांकि, यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय और यूरोपीय संघ के शीर्ष न्यायालय ने इन नियुक्तियों को गैर-कानूनी ठहराते हुए पोलैंड के संवैधानिक न्यायालय की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे।
इसके आधार पर टस्क सरकार ने न्यायालय के फैसलों का प्रकाशन रोक दिया था। संसदीय चुनाव के बाद टस्क सरकार पीआईएस काल के बदलावों को पूरी तरह पलटने की कोशिश कर रही है, लेकिन राष्ट्रपति के वीटो अधिकार और नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाने से इनकार के कारण गतिरोध बना हुआ है। फिलहाल न्यायाधीश अन्ना कोरविन-पियोट्रोवस्का को न्यायालय का अस्थायी कार्यभार सौंपा गया है।