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अमेरिकी व्यापार समझते में स्थानीय हित रहेगाः गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने देश को आश्वस्त किया

भारतीय किसानों का हित सुरक्षित है

सार्वजनिक मंच से इसका एलान किया

सरकार राष्ट्रीय हित पर ध्यान देगी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत, अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते में अपने किसानों या हितधारकों के किसी भी संवेदनशील हित से समझौता नहीं करेगा। समझौता अंतिम रूप लेने के बाद भारत के पास एक मजबूत तुलनात्मक बढ़त (कॉम्पिटिटिव एडवांटेज) होगी।

इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएशन  के चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, मुझे नहीं पता कि लोग किस बात की आलोचना कर रहे हैं, लेकिन मुझमें यह घोषणा करने का साहस और दृढ़ विश्वास है कि जब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का विवरण सामने आएगा, तो भारत के लोग जश्न मनाएंगे कि हमारे किसानों या किसी भी हितधारक के एक भी संवेदनशील हित से समझौता नहीं किया गया है।

गोयल की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दोनों देश प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।

निरपेक्ष व्यापार आंकड़ों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मकता को अधिक महत्वपूर्ण बताते हुए मंत्री ने कहा कि व्यापार समझौतों की सफलता का आकलन इस बात से किया जाना चाहिए कि वे प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत को कितना सापेक्ष लाभ प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, व्यापार तुलनात्मक लाभ के बारे में है। निरपेक्ष संख्या उतनी महत्वपूर्ण नहीं है जितनी कि आपकी तुलना में प्रतिस्पर्धा करने वालों के सामने आपकी प्रतिस्पर्धात्मकता।

गोयल ने भारत द्वारा अब तक अंतिम रूप दिए गए आठ मुक्त व्यापार समझौतों का पुरजोर बचाव किया और आलोचकों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध इन समझौतों में एक भी खामी ढूंढ निकालने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, मुझे अभी तक ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला जो निष्कर्ष निकाले गए और बाजार में सार्वजनिक आठ मुक्त व्यापार समझौतों में से किसी एक में भी एक भी खामी ढूंढ सके।

प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से घिरी आलोचनाओं पर निशाना साधते हुए गोयल ने कहा कि कुछ तत्व अभी पूरे विवरण उपलब्ध न होने के बावजूद इस समझौते का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, नौवें, यानी अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते का कुछ तत्वों द्वारा राजनीतिकरण करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस आलोचना का कारण समझ या ज्ञान की कमी को बताया और कहा, विवरण अभी पूरी तरह से बाहर नहीं आए हैं। मुझे नहीं पता कि वे किस बात की आलोचना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के नए व्यापार समझौतों ने लगभग 60 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं में तरजीही बाजार अवसर खोले हैं, जबकि 2014 से पहले हुए समझौतों के तहत यह आंकड़ा केवल 10 ट्रिलियन डॉलर का था।

मंत्री ने तर्क दिया कि भारत को पहले कपड़ा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धी नुकसान का सामना करना पड़ा था, जहां बांग्लादेश और वियतनाम सहित देशों को विकसित बाजारों में तरजीही पहुंच का लाभ मिला था। उन्होंने कहा कि सरकार के व्यापार समझौते स्थानीय संवेदनशीलता की रक्षा करते हुए इन कमियों को दूर करने का प्रयास करते हैं।