आईडीबीआई के निजीकरण के सरकारी प्रस्ताव का विरोध
कर्मचारी संघ आंदोलन पर हैं
सरकार वादा खिलाफी कर रही है
कनाडा की कंपनी को हिस्सेदारी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण का कड़ा विरोध करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आंदोलनकारी बैंक कर्मचारियों को अपना पूरा समर्थन दिया है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि बैंक पूरी तरह से निजी स्वामित्व में चला जाता है, तो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों का जन-संरक्षण (आरक्षण एवं सामाजिक सुरक्षा) खतरे में पड़ सकता है।
गुरुवार को आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों को लिखे एक पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि बैंक ने अथक परिश्रम करके पिछले वर्ष 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया है। वित्तीय स्थिति में इस सुधार के बावजूद सरकारी हिस्सेदारी बेचने के फैसले पर उन्होंने सवाल उठाए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2003 में तत्कालीन वाजपेयी सरकार की ओर से संसद में यह आश्वासन दिया गया था कि आईडीबीआई बैंक में सरकार की कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी। राहुल ने आगे कहा कि वर्तमान सरकार देश की जनता से किए गए उस वादे का उल्लंघन कर रही है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कनाडा स्थित निवेश फर्म फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को आईडीबीआई बैंक की 60.72 फीसद नियंत्रक हिस्सेदारी लगभग 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दे दी है। इसके विरोध में बैंक कर्मचारी यूनियनों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज ने इस प्रक्रिया को रोकने की मांग करते हुए नवंबर में देशव्यापी हड़ताल और भूख हड़ताल का आह्वान किया है। इसी बीच राहुल गांधी का यह समर्थन पत्र सामने आया है।