ओडिशा में सियासी घमासान और तेज सीजेपी नेताओं की रिहाई पर बयान
पटनायक ने किया खुला समर्थन
तिरंगा फहराने पर हिरासत गलत
प्रदेश भाजपा ने बयान की निंदा की है
प्रसन्न मोहंति
भुवनेश्वरः ओडिशा की राजनीति इन दिनों सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी के मुद्दे पर गरमा गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर में 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय ध्वज फहराने और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने पर कॉक्रॉच जनता पार्टी के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर शांति भंग करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और बाद में हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई।
इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने दोनों नेताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि चाहे निषिद्ध क्षेत्र में ही सही, राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर इतनी लंबी हिरासत उचित नहीं है और न्यायपालिका व कार्यपालिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश के युवाओं का कानून के शासन पर से विश्वास न उठे।
गौरतलब है कि अब तक बीजेडी खुद को सम दूरत्व की राजनीति पर चलने वाली पार्टी बताती रही है, यानी भाजपा और कांग्रेस दोनों से समान दूरी। लेकिन सीजेपी नेताओं के समर्थन और एसआईआर के मुद्दे पर ममता बनर्जी और कांग्रेस के सुर में सुर मिलाने से यह साफ हो गया है कि बीजेडी अब धीरे-धीरे विपक्षी गठबंधन के करीब जा रही है।
इस पर भाजपा ने कड़ा पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने कहा, भारत लोकतंत्र है, भीड़तंत्र नहीं। जंतर-मंतर अब धरना स्थल नहीं है। वहां बिना अनुमति घुसना, गेट फांदना और पुलिस के काम में बाधा डालना कोई लोकतांत्रिक अधिकार नहीं है। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हिरासत बढ़ाई है, यह कोई राजनीतिक बदला नहीं है। उन्होंने कहा, 24 साल तक मुख्यमंत्री रहे नवीन बाबू से इस तरह अराजकतावादियों का समर्थन करने की उम्मीद नहीं थी। राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा किसी भी राजनीतिक पीआर से बड़ी है। नवीन बाबू अब राहुल गांधी की तरह न्यायिक प्रणाली पर दबाव बनाने और देश की संस्थाओं को बदनाम करने की राजनीति कर रहे हैं।
भाजपा ने यह भी कहा कि बीजेडी का दोहरा चरित्र सामने आ गया है। वह बाहर सम दूरी की बात करती है लेकिन अंदर से विपक्षी इंडिया गठबंधन के साथ खड़ी है। साथ ही भाजपा ने आरोप लगाया कि बीजेडी शासनकाल में अवैध घुसपैठियों को वोटर बनाया गया, इसलिए अब बीजेडी एसआईआर का विरोध कर रही है और युवा वोटर के नाम पर सस्ती लोकप्रियता बटोरना चाहती है। कानून अपना काम करेगा, स्टंट से लोकतंत्र हाईजैक नहीं होगा।