Breaking News in Hindi

स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क ने परोक्ष आरोप मढ़ दिया

भारत में स्टारलिंक को रोक रहे हैं प्रभावशाली लोग

परोक्ष तौर पर सीधा अंबानी पर आरोप

काफी समय से लंबित है इसकी अनुमति

यह प्रतिस्पर्धा के लिहाज से अपराध है

वाशिंगटनः स्पेसएक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क ने भारत में कंपनी की सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा स्टारलिंक के कमर्शियल लॉन्च में आ रही रुकावटों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि देश के दूरसंचार और इंटरनेट सेवा बाजार पर लगभग एकाधिकार रखने वाले कुछ प्रभावशाली कॉरपोरेट घराने और उद्योगपति अपनी स्थिति को बचाने के लिए इस प्रोजेक्ट को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

बुधवार को दिए गए एक बयान में मस्क ने स्पष्ट किया कि बिना नाम लिए गए ये उद्योगपति उपभोक्ताओं को अधिक किफायती और आधुनिक विकल्प मिलने से वंचित कर रहे हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर भारत के आम नागरिकों के खिलाफ एक अपराध करार दिया। मस्क के अनुसार, एकाधिकारवादी मानसिकता वाले ये कुलीन वर्ग अपने व्यावसायिक स्वार्थों के चलते भारतीय जनता को सस्ती और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी से दूर रखना चाहते हैं।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब स्पेसएक्स भारत सरकार से लाइसेंस प्राप्त करने और अपने स्पेक्ट्रम आवंटन के अंतिम नियमों का इंतजार कर रही है। हालांकि भारत सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशंस के लिए प्रशासनिक रूप से स्पेक्ट्रम आवंटित करने की नीति अपनाई है, लेकिन बाजार के बड़े घरेलू खिलाड़ियों और वैश्विक अंतरिक्ष कंपनियों के बीच स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण और लाइसेंस की शर्तों को लेकर खींचतान जारी है।

स्पेसएक्स का स्टारलिंक प्रोजेक्ट लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रहों के नेटवर्क के जरिए देश के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने का दावा करता है, जहां पारंपरिक फाइबर या केबल नेटवर्क पहुंचाना या तो कठिन है या आर्थिक रूप से महंगा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्टारलिंक को देश में कम कीमतों पर सेवाएं देने की अनुमति मिलती है, तो यह मौजूदा टेलीकॉम ऑपरेटरों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

मस्क ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इस बात पर जोर दिया है कि भारत जैसे विशाल डिजिटल बाजार में प्रतिस्पर्धा का होना उपभोक्ताओं के हित में सबसे जरूरी है। उनके इस तीखे बयान के बाद देश के टेलीकॉम सेक्टर में एकाधिकार और खुली प्रतिस्पर्धा के नियमों को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है।