जनवरी में एमडीआर खत्म करने की चर्चा
अनेक स्थानों पर इसका प्रयोग बंद
त्योहारी सीजन में और भी नाराजगी
चुनाव से पहले वापसी हो सकती है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः डिजिटल भुगतान की दुनिया से जुड़ी एक बेहद अहम खबर सामने आ रही है, जिसके तहत केंद्र सरकार देश भर में करोड़ों उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में जुटी हुई है। पिछले कुछ समय से इस बात को लेकर जोरों पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट को आगामी 15 अक्टूबर से लागू करने के अपने पूर्व निर्धारित फैसले को स्थगित कर सकती है। विश्लेषकों और आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि सरकार इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाते हुए इसे सीधे जनवरी 2027 तक के लिए टाल सकती है, ताकि अर्थव्यवस्था और आम जनता पर अचानक किसी प्रकार का वित्तीय दबाव न पड़े।
इस संभावित स्थगन के पीछे की मुख्य वजहों पर विचार करने के लिए नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की अध्यक्षता में यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों की एक उच्च-स्तरीय बैठक बुधवार को संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा इस बहुप्रतीक्षित और विवादास्पद रोलआउट पर विस्तार से चर्चा करना तथा विभिन्न व्यापारिक संघों, वित्तीय जानकारों और हितधारकों द्वारा उठाई जा रही शंकाओं व चिंताओं का स्पष्ट समाधान खोजना था। आधिकारिक हलकों और प्रशासनिक गलियारों में यह व्यापक आम सहमति बनती दिख रही है कि यदि इस फैसले को फिलहाल टाल दिया जाता है, तो इससे देश में आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को भारी राहत मिलेगी, और पात्र मर्चेंट भुगतान पूरी तरह से एमडीआर शुल्क के दायरे से बाहर यानी मुक्त बने रहेंगे।
इसके अलावा, बैठक से छनकर आ रही अंदरूनी खबरों और सूत्रों के अनुसार, स्टीयरिंग कमेटी सिर्फ स्थगन पर ही विचार नहीं कर रही है, बल्कि वह छोटे और मझोले कारोबारियों को बड़ा फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में व्यापक ढील देने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। समिति उन व्यवसायों को भी इस छूट के दायरे में लाने का पुरजोर प्रयास कर रही है, जिनका वार्षिक कारोबार 40 लाख रुपये तक है। यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो यह पूर्व के उस प्रस्तावित फ्रेमवर्क का दायरा कई गुना बढ़ा देगा, जिसके शुरुआती प्रावधानों के तहत केवल उन्हीं छोटे व्यापारियों को इस शुल्क से छूट मिलने का प्रावधान था जो यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से प्रति माह महज 1,000 रुपये तक की राशि प्राप्त करते थे।
यहाँ यह समझना प्रासंगिक है कि आखिरकार मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वास्तव में है क्या। यह मूल रूप से वह सेवा शुल्क या प्रोसेसिंग फीस होती है, जिसे व्यापारी अपने ग्राहकों द्वारा किए जाने वाले डिजिटल भुगतानों को सफलतापूप्रवक प्रोसेस कराने और अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करने के एवज में वित्तीय संस्थानों या पेमेंट गेटवे को चुकाते हैं। हाल ही में घोषित किए गए फ्रेमवर्क के अनुसार, यह तय किया गया था कि 2,000 रुपये से अधिक के सभी योग्य पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत का शुल्क लगाया जाएगा, जिसे प्रति लेन-देन अधिकतम 300 रुपये की एक निश्चित सीमा के भीतर सीमित किया जाना था।
जैसे ही एमडीआर लागू करने की सुगबुगाहट तेज हुई, देश भर के तमाम छोटे-बड़े व्यापारिक संगठनों, खुदरा दुकानदारों और व्यापारी महासंघों ने सरकार के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसे टालने की औपचारिक मांग की थी। हालांकि, इन तमाम अटकलों और बहसों के बीच सरकारी सूत्रों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यही स्पष्ट किया है कि भले ही उच्च स्तर पर बैठकों और विमर्शों का दौर जारी है, लेकिन इस पूरे मामले पर सरकार की तरफ से अभी तक कोई अंतिम या आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है, और आने वाले दिनों में ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।