चमकेगा शनि और बरसेगी हैली धूमकेतु की उल्काएं
शनि ग्रह का वैज्ञानिक रहस्य
सूर्य और शनि के बीच पृथ्वी होगी
ओरियनिड उल्काओं की बौछार होगी
राष्ट्रीय खबर
रांचीः अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए यह महीना बेहद रोमांचक रहने वाला है। अक्टूबर के महीने में आकाश में एक के बाद एक कई अद्भुत और दुर्लभ खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी। इस दौरान जहाँ एक ओर वलयधारी शनि ग्रह अपनी पूरी चमक के साथ ऑपोज़िशन की स्थिति में नजर आएगा, वहीं दूसरी ओर प्रसिद्ध हैली धूमकेतु के अवशेषों से बनी ओरियनिड उल्का बौछार आसमान को रोशन करेगी। इसके अलावा चंद्रमा और सेवेन सिस्टर्स (प्लेएड्स) तारामंडल की नजदीकियां भी इस महीने के मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
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खगोलीय कार्यक्रमों की शुरुआत इस महीने की शुरुआत में शनि ग्रह के ऑपोज़िशन के साथ हो चुकी है। खगोलविदों के अनुसार, जब पृथ्वी सूर्य और शनि के ठीक बीच में आ जाती है, तो उसे ऑपोज़िशन कहते हैं। इस स्थिति में शनि सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में नजर आता है, जिससे यह सूर्यास्त के समय उगता है और लगभग पूरी रात आसमान में अपनी अद्भुत चमक बिखेरता है। यह इस वलयधारी ग्रह को निहारने का साल का सबसे बेहतरीन समय माना जाता है।
इसके साथ ही शनि ग्रह अपने वायुमंडल में हो रहे अनूठे बदलावों के कारण वैज्ञानिकों के बीच भी खासी चर्चा में है। इसके उत्तरी ध्रुव पर पहले से ही एक विशाल षट्कोणीय जेट स्ट्रीम मौजूद है। हाल ही में नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप के जरिए इसके दक्षिणी ध्रुव के पास एक दस-भुजा वाली वायुमंडलीय लहर का पता चला है, जो शोधकर्ताओं को किसी विशाल मौसमी संरचना के विकास को करीब से देखने का दुर्लभ अवसर प्रदान कर रही है।
अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में अंतरिक्ष से एक और शानदार नजारा देखने को मिलेगा। 21 अक्टूबर की रात से लेकर 22 अक्टूबर की सुबह तक ओरियनिड उल्का बौछार अपने चरम पर होगी। ये उल्काएं दरअसल प्रसिद्ध हैली धूमकेतु द्वारा छोड़े गए छोटे-छोटे कणों और अवशेषों से बनती हैं। हालांकि ये उल्काएं ओरियन नक्षत्र की दिशा से आती प्रतीत होती हैं, लेकिन ये आकाश के किसी भी हिस्से में चमकती हुई दिखाई दे सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल चंद्रमा की तेज रोशनी के कारण रात के शुरुआती पहर में कुछ हल्की उल्काएं छिप सकती हैं। ऐसे में इन्हें देखने का सबसे अनुकूल समय चंद्रमा के अस्त होने के बाद और भोर होने से ठीक पहले का होगा। बेहतर अनुभव के लिए शहर की चकाचौंध से दूर किसी अंधेरे और खुले स्थान पर जाने की सलाह दी गई है।
महीने के अंत यानी 27 से 28 अक्टूबर की रात को चंद्रमा और प्रसिद्ध प्लेएड्स तारामंडल (जिसे सात बहनों या कृत्तिका के नाम से भी जाना जाता है) का करीबी मिलन देखने को मिलेगा। प्राचीन काल से ही विभिन्न संस्कृतियों में कहानियों का हिस्सा रहा यह तारामंडल लगभग पूरी दुनिया से आसानी से देखा जा सकता है। शाम के समय पूर्व दिशा की ओर देखने पर यह समूह 6 से 7 धुंधले तारों के एक खूबसूरत झुंड के रूप में नजर आता है। इसे देखने के लिए किसी महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं होती, हालाँकि दूरबीन के जरिए इसके बारीक और सुंदर विवरण साफ देखे जा सकते हैं।
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