आज के दौर का जीपीएस अति प्राचीन काल में भी मौजूद था
जीवाश्मों में इसकी खोज की गयी है
ये करीब 97 मिलियन वर्ष पुराने हैं
मैग्नोटोसेप्शन की प्रकृति इनमें थी
राष्ट्रीय खबर
रांचीः शोधकर्ताओं ने संभवतः आंतरिक पशु जीपीएस प्रणाली के सबसे शुरुआती सबूतों की पहचान की है, जिससे आधुनिक पक्षियों, मछलियों और जीवों के पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करके नेविगेट करने की क्षमता के विकास का पता चलता है। यह प्रमाण 97 मिलियन वर्ष पुराने छोटे चुंबकीय जीवाश्मों से मिलता है, जो प्राचीन समुद्र तल के तलछट में संरक्षित थे।
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कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और हेल्महोल्ट्ज़ ज़ेंट्रम बर्लिन के वैज्ञानिकों ने इन जीवाश्मों के अंदर की चुंबकीय संरचना की पहली 3डी छवियां तैयार कीं। जर्नल कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित यह शोध बताता है कि ये संरचनाएं पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और शक्ति दोनों का पता लगाने के लिए अनुकूलित थीं। कैम्ब्रिज के प्रोफेसर रिच हैरिसन के अनुसार, यह इस बात का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जानवर करोड़ों साल पहले सटीक नेविगेशन में सक्षम थे।
मैग्नोटोसेप्शन (चुंबकीय संवेदन) प्रकृति की सबसे रहस्यमय इंद्रियों में से एक है। झील के कुछ बुनियादी बैक्टीरिया मैग्नेटाइट कणों का उपयोग करके अपने तैरने की दिशा तय करते हैं। हालांकि, उत्तरी अटलांटिक महासागर से मिले ये जीवाश्म उन बैक्टीरियल कणों से 10 से 20 गुना बड़े हैं और कहीं अधिक परिष्कृत हैं।
वैज्ञानिकों ने जब एक नई इमेजिंग तकनीक से इन बड़े मैग्नोटोफॉसिल की जाँच की, तो एक अप्रत्याशित आंतरिक पैटर्न सामने आया। इसके चुंबकीय कण एक केंद्रीय रेखा के चारों ओर बवंडर (टारनेडो) जैसे सर्पिल रूप में व्यवस्थित थे। इस अनोखी वॉर्टेक्स मैग्निटिज़्म संरचना के कारण यह कण न केवल पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के झुकाव से अक्षांश का पता लगाता है, बल्कि देशांतर के साथ बदलने वाली उसकी शक्ति को भी मापता है। यह स्थिर संरचना हजारों किलोमीटर की यात्रा के दौरान बाहरी गड़बड़ियों से भी सुरक्षित रहती है।
अब वैज्ञानिकों का अगला सवाल यह है कि इस प्रणाली को किस जीव ने बनाया था। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि लगभग 100 मिलियन वर्ष पहले विकसित होने वाली ईल इस कार्य के लिए एक संभावित उम्मीदवार हो सकती हैं। आज भी आधुनिक यूरोपीय और अमेरिकी ईल मीठे पानी से हजारों किलोमीटर दूर सारगासो सागर में प्रजनन के लिए अद्भुत प्रवास करती हैं। हालांकि जीव की सटीक पहचान अभी बाकी है, लेकिन ये विशाल मैग्नोटोफॉसिल पशु जगत में बुनियादी जीवाणु नेविगेशन से अत्यधिक विकसित जीपीएस जैसी प्रणाली के विकास में एक मील का पत्थर साबित होते हैं।
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