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सीएजी रिपोर्ट में डीएमएफ घोटाले का खुलासा, 3,657 करोड़ का ब्याज गायब

पीड़ित गांवों को एक रुपया नहीं, 983 करोड़ गैर-प्रभावितों को

योजना का 52 फीसद हिस्सा बेकार रहा

584 गांवों में एक भी प्रोजेक्ट नहीं लगा

निजी बैंकों में इसका पैसा जमा कराया

प्रसन्न महांति

भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा में हाल ही में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट ने पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड के बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रबंधन और कथित घोटालों का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया है।

यह विस्तृत रिपोर्ट वर्ष 2015-16 से लेकर 2023-24 तक के कार्यकाल की समीक्षा पर आधारित है। सीएजी की इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के छह प्रमुख खनिज-समृद्ध जिलों—केंदुझर, सुंदरगढ़, जाजपुर, मयूरभंज, ढेंकानाल और नबरंगपुर में खनन गतिविधियों से कुल 22,568.17 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा हुई थी। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इस विशाल राशि का 52 प्रतिशत हिस्सा बिना किसी उपयोग के यूं ही बेकार पड़ा रहा और इसके सदुपयोग के लिए कोई समेकित या दूरदर्शी योजना तक नहीं बनाई गई।

ऑडिट रिपोर्ट में सबसे गंभीर खुलासा यह हुआ है कि केंदुझर और सुंदरगढ़ जैसे अत्यधिक खनन प्रभावित जिलों में 488 सीधे तौर पर प्रभावित और 96 परोक्ष रूप से प्रभावित गांवों—यानी कुल 584 गांवों में एक भी डीएमएफ प्रोजेक्ट तक शुरू नहीं किया गया। इसके ठीक विपरीत, नियमों को ताक पर रखकर 976 गैर-प्रभावित गांवों में लगभग 983.32 करोड़ रुपये के विकास प्रोजेक्ट बांट दिए गए।

वित्तीय अनियमितताओं का दायरा यहीं खत्म नहीं होता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि डीएमएफ के करोड़ों रुपये सुरक्षित सरकारी बैंकों के बजाय निजी बैंकों में जमा कराए गए, जिसके परिणामस्वरूप भारी मात्रा में ब्याज का नुकसान हुआ। अकेले केंदुझर जिले में ही 1,200 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

इसके अलावा, कोरोना महामारी की आड़ में लगभग 145.06 करोड़ रुपये की गंभीर वित्तीय हेराफेरी का मामला भी सामने आया है, जहां बिना किसी पूर्व अनुमति के निजी अस्पतालों में बेड आरक्षित करने के नाम पर भारी राशि जारी कर दी गई। उदाहरण के लिए, सुंदरगढ़ डीएमएफ ने राउरकेला स्थित जयप्रकाश हॉस्पिटल को 109.45 करोड़ रुपये दिए, जिसमें नियमों के विरुद्ध 10.60 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान शामिल था।

निर्माण कार्यों पर न कटने वाला सेस भी जबरन वसूला गया, जिसमें केवल सुंदरगढ़ में ही 48.15 करोड़ रुपये की अवैध कटौती की गई। इसके अतिरिक्त, कुल 142.83 करोड़ रुपये का सरासर अनियमित खर्च किया गया, जिसमें राउरकेला में हॉकी स्टेडियम के निर्माण के लिए 136.77 करोड़ रुपये और बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के पांच छात्रों को विदेश में पढ़ाने के लिए 6.06 करोड़ रुपये लुटा दिए गए। सीएजी की इस रिपोर्ट ने प्रशासनिक पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।