Breaking News in Hindi

रिलीफ कैंप में पच्चीस की मौत का मामला

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार से सीधा जबाव मांगा

एसआईटी ने 3020 मामले दर्ज किया

कुल 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल

थौबल में हथियार और गोला बारूद जब्त

भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी: सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के राहत शिविरों में हुई संदिग्ध और अप्राकृतिक मौतों पर गहरी चिंता जताते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे राहत शिविरों में हुई मौतों और उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी देते हुए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें।

न्यायालय ने यह संज्ञान जस्टिस गीता मित्तल कमेटी और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 8 जिलों के राहत शिविरों में कुल 640 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से 25 से अधिक मौतें संदिग्ध और अप्राकृतिक थीं। कोर्ट ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि इतनी गंभीर मौतों के बावजूद केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम क्यों कराया गया। इसके साथ ही, शिविरों में अप्राकृतिक मौतों का शिकार हुए विस्थापितों को दिए गए 20,000 से 30,000 रुपये के मुआवजे को बेहद कम बताते हुए इस पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (एमएसएलएसए) को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि हर अप्राकृतिक मौत के मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज हो और बिना किसी देरी के जांच पूरी की जाए। इसके अलावा, शिविरों में रह रहे विस्थापितों की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए भी पुख्ता कदम उठाने को कहा गया है।

सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को अवगत कराया कि सीबीआई ने जातीय हिंसा से जुड़े 31 मामलों में से 28 में अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है, जबकि शेष मामलों की जांच जारी है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा गठित 42 विशेष जांच टीमों (एसआईटी) ने 3,020 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और 33 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुका है।

दूसरी ओर, एक अन्य घटनाक्रम में सुरक्षा बलों ने थौबल जिले के हीरोक क्षेत्र में संयुक्त अभियान चलाकर एक डबल-बैरल बंदूक, एक देसी राइफल और जिंदा कारतूसों सहित अवैध हथियारों का जखीरा बरामद किया है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि ये हथियार किन असामाजिक गतिविधियों के लिए छिपाए गए थे।