बंगाल में 37 लाख से अधिक अपील लंबित
चुनाव से पहले हटाये गये थे सभी
अधिकांश नाम दोबारा जुड़े रहे हैं
प्राधिकरणों का काम बहुत धीमा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को एक हलफनामे में बताया है कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों से नाम हटाने या जोड़ने के खिलाफ 37 लाख से अधिक अपीलें अभी भी लंबित हैं। आयोग के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त ट्रिब्यूनलों ने अब तक दायर कुल 38,20,683 अपीलों में से केवल लगभग 1,02,231 का ही निपटारा किया है। हालांकि, हलफनामे में उन मतदाताओं द्वारा दायर अपीलों का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया जिनके नाम हटाए गए थे और जिनका नाम जोड़ने के खिलाफ अपील की गई थी।
यह मामला 17 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष आया था, जिसने कांग्रेस की बंगाल इकाई की एसआईआर समिति के अध्यक्ष प्रसेनजित बोस की याचिका पर सुनवाई की थी। याचिका में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हटाए गए मतदाताओं के विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों के खुलासे की मांग की गई थी। बोस ने अपनी याचिका में बताया था कि एसआईआर के दौरान 58 लाख से अधिक मतदाताओं को बाहर किया गया था। शीर्ष अदालत ने 25 अगस्त को चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह ट्रिब्यूनलों द्वारा अपीलों के लंबित रहने और उनके निपटारे से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत करे। अदालत ने यह भी पूछा था कि लंबित अपीलों के निस्तारण को सुगम बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और कितने अतिरिक्त ट्रिब्यूनलों की आवश्यकता है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 17 दिसंबर 2025 से 7 अगस्त 2026 के बीच फॉर्म-6 के तहत 34.13 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। शीर्ष अदालत के निर्देश पर कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने पूर्व न्यायाधीशों के नेतृत्व में 19 ट्रिब्यूनल गठित किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल मतदाता सूची से नाम हटने मात्र से किसी की नागरिकता तय नहीं होती, लेकिन कानूनी चुनौतियों के कारण प्रभावित लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पिछले महीने कहा था कि एसआईआर के दौरान बाहर किए गए नामों से जुड़ी शिकायतों का समाधान 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले पूरी तरह कर लिया जाएगा।