तेल परिवहन के दोनों समुद्री मार्गों पर एक जैसा खतरा
दुबईः ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने शुक्रवार को यमन के पूरे लाल सागर तट पर कब्जा करने के साथ-साथ तीन सामरिक द्वीपों पर भी नियंत्रण हासिल कर लिया है। यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले इस बेहद महत्वपूर्ण नौवहन गलियारे पर नियंत्रण पाने के लिए हूतियों ने एक हफ्ते तक चले आक्रामक अभियान के तहत बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के यमन वाले हिस्से और मय्युन द्वीप को अपने कब्जे में ले लिया है। इस तीव्र सैन्य अभियान के कारण अब तक दोनों पक्षों के 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि संयुक्त राष्ट्र की प्रवास एजेंसी के अनुसार करीब 46,000 लोग विस्थापित हुए हैं।
सरकारी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस बिजली जैसे अभियान में हूतियों ने ग्रेटर और लेसर हानिश द्वीपों के अलावा आसपास के पूरे लाल सागर तट पर भी अधिकार जमा लिया है। बाब अल-मंडब के मध्य में स्थित मय्युन द्वीप पर कब्जा होने से सऊदी तेल टैंकरों पर हमले करने की हूतियों की क्षमता और अधिक बढ़ गई है। इससे पहले ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी करने के बाद दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश सऊदी अरब ने लाल सागर पर अपनी निर्भरता बढ़ाई थी, लेकिन अब इन हमलों के कारण सऊदी अरब को अपनी एक प्रमुख तेल पाइपलाइन भी एहतियातन बंद करनी पड़ी है।
इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट मंडराने लगा है। हूती सैन्य प्रवक्ता यह्या सारी ने दावा किया है कि सऊदी अरब को छोड़कर बाकी सभी देशों के जहाजों के लिए बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य में नौवहन पूरी तरह सुरक्षित है। दूसरी ओर, यमन सरकार और सऊदी गठबंधन ने इन इलाकों को वापस पाने के लिए हवाई हमले और जवाबी गोलाबारी शुरू कर दी है, जिससे इस क्षेत्र में एक बार फिर भीषण गृहयुद्ध के लौटने का खतरा पैदा हो गया है