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चीन की सीमा पर ग्यिरोंग में तबाही के निशान, देखें तबाही का वीडियो

इतने दिनों के बाद विदेशी मीडिया को जाने की अनुमति दी

शानदार इलाका पूरा मलबा बन चुका

यहां भी पांच सौ से अधिक लोग लापता

भारतीय तीर्थयात्रियों का जत्था भी था यहां

बीजिंगः चीन और नेपाल की सीमा पर 26 अगस्त को नेपाल की तरफ अचानक एक बड़ा ग्लेशियर ढह गया। इसके बाद नदी घाटी में कीचड़, मलबा और पानी का ऐसा प्रचंड सैलाब आया जिसने किसी सुनामी की तरह मुख्य ग्यिरोंग सीमा पारगमन और उसके बंदरगाह को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इस प्रलयकारी प्राकृतिक आपदा में दोनों देशों को मिलाकर अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,000 से भी ज्यादा लोग लापता हैं। केवल चीन की सीमा में शनिवार तक 43 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी थी और 519 लोग अभी भी लापता श्रेणी में दर्ज हैं। इन लापता लोगों में 23 अलग-अलग देशों के 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय नागरिक भी हैं।

देखें तबाही का वीडियो

आपदा के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चीन सरकार ने शुरू में इस तबाही से जुड़े तस्वीरों और वीडियो के प्रसारण को सीमित रखा था। रविवार को चीन के विदेश मंत्रालय ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए इस प्रभावित क्षेत्र की एक यात्रा आयोजित की, जहाँ विनाश के डरावने दृश्य सामने आए। सीमा पर मौजूद विशाल पाँच मंज़िला चीनी सीमा शुल्क भवन मलबे के नीचे पूरी तरह समा चुका है और उसका कोई नामोनिशान नहीं बचा है।

20 मीटर ऊँचे मुख्य सीमा द्वार की जगह अब चीनी कर्मियों ने राष्ट्रध्वज गाड़ दिया है।  वर्तमान में चमकीली नारंगी वर्दी पहने चीनी राहत व बचाव दल के कर्मी मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश में दिन-रात जुटे हुए हैं। इसके लिए भारी उत्खनक मशीनों, फावड़ों के साथ-साथ जमीन में गहराई तक देखने वाले आधुनिक रडार का प्रयोग किया जा रहा है। बरामद किए जा रहे शवों की शिनाख्त के लिए फिंगरप्रिंट्स और शरीर के टैटू जैसे चिह्नों को दर्ज किया जा रहा है।  हालांकि, पीड़ितों के डीएनए परीक्षण और फेशियल-रिकॉग्निशन फुटेज साझा करने के संबंध में बीजिंग की पारदर्शी नीति न होने के कारण विदेशी राजनयिकों और पीड़ित परिवारों में असंतोष है।

यह ग्यिरोंग मार्ग तिब्बत स्थित पवित्र माउंट कैलाश की यात्रा पर जाने वाले हिंदू और बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट बिंदु था। चीनी अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि वे समय पर चेतावनी देने में विफल रहे। उनका कहना है कि यह आपदा नेपाल के क्षेत्र में उत्पन्न हुई थी, इसलिए भविष्य में ऐसी आपदाओं की निगरानी और पूर्व चेतावनी क्षमता बढ़ाने के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।