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अब हवाई अड्डे के लिए दो स्थलों की पहचान की

किसानों के खिलाफ मामला दर्ज करने का विजय का मजबूत फैसला

परंदूर परियोजना को रद्द किया गया था

वहां के किसान इसका विरोध कर रहे थे

नये स्थानों की रिपोर्ट भेज दी गयी है

राष्ट्रीय खबर

चेन्नई: तमिलनाडु में तमिझगा वेत्री कड़गम के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में एक नए हवाई अड्डे के निर्माण के लिए दो संभावित स्थलों का चयन किया है। सूत्रों द्वारा दी गई यह जानकारी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा परंदूर हवाई अड्डा परियोजना को आधिकारिक तौर पर रद्द किए जाने के ठीक बाद सामने आई है।

राज्य सरकार ने नए हवाई अड्डे की स्थापना के लिए मानेल्लोर और चेय्यूर को संभावित विकल्पों के रूप में चिन्हित किया है। सूत्रों के मुताबिक, ये दोनों स्थान महज एक सप्ताह के भीतर तय किए गए हैं। इन दोनों स्थलों की सिफारिश भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को व्यवहार्यता अध्ययन के लिए भेज दी गई है। यह प्रस्तावित हवाई अड्डा चेन्नई महानगरीय क्षेत्र की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया जाएगा। दूरी के लिहाज से मानेल्लोर चेन्नई से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है, जबकि चेय्यूर शहर से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर है।

चेन्नई के पास ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना को अचानक रद्द करने के फैसले के बाद से विजय सरकार को विपक्ष के कड़े विरोध और तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री विजय ने अपने इस कदम का बचाव किया और किसानों के हितों को परियोजना रद्द करने की मुख्य वजह बताया।

उन्होंने स्वीकार किया कि ग्रेटर चेन्नई की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने, औद्योगिक विकास को गति देने और कार्गो परिवहन के विस्तार के लिए दूसरे हवाई अड्डे की अत्यंत आवश्यकता है। हालांकि, उनका तर्क था कि नए हवाई अड्डे का चयन इस तरह होना चाहिए जिससे उपजाऊ कृषि भूमि और आवासीय बस्तियों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे। विजय ने कहा कि पिछली सरकार ने किसानों और कई रिहायशी इलाकों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की अनदेखी करते हुए परंदूर परियोजना को आगे बढ़ाया था। परंदूर स्थान चेन्नई-बेंगलुरु राजमार्ग के पास श्रीपेरंबदूर से लगभग 28 किलोमीटर दूर है।

विधानसभा में उग्र बहस के बीच, ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने पिछली द्रमुक सरकार पर बिना किसी पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन या आवश्यक स्वीकृतियों के भूमि अधिग्रहण करने का आरोप लगाया। मंत्री ने द्रमुक के इस दावे को खारिज कर दिया कि 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित स्थल पर कई जल निकाय मौजूद थे और न तो कोई पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन कराया गया था और न ही इसके लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी ली गई थी।

मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया, परियोजना के लिए कुल 5,846 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें 3,774 एकड़ निजी पट्टा भूमि शामिल है—जिसमें से 2,681 एकड़ अत्यधिक उपजाऊ कृषि भूमि है। इसके अलावा 1,972 एकड़ सरकारी भूमि में से 1,558 एकड़ भूमि में जल निकाय और नहरें शामिल हैं। अब तक केवल लगभग 1,802 एकड़ यानी 48 प्रतिशत भूमि ही अधिग्रहित की जा सकी थी।

द्रमुक विधायक एस. ऑस्टिन की इस आलोचना का जवाब देते हुए कि 90 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद परियोजना को रद्द करने से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान होगा, मंत्री कुमार ने बताया कि एकनापुरम, करई, थंडलम और सिरुवलूर सहित कई गांवों में तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई थी।