नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद ने एक और नई जानकारी
ग्रह के दक्षिणी ध्रुव के करीब है यह तरंग
उत्तरी ध्रुव पर षटकोणिय आकार मौजूद
आंकड़े बताते हैं कि नई आकृति बन रही
राष्ट्रीय खबर
रांचीः नासा के वैज्ञानिकों ने शनि ग्रह पर 10 भुजाओं वाले विशाल आकार की खोज की है। नासा के हबल स्पेस टेलिस्कोप ने शनि ग्रह के वातावरण में एक असाधारण नई विशेषता की खोज की है: ग्रह के दक्षिणी ध्रुव का चक्कर लगाती हुई एक विशाल, विकसित होती 10 भुजाओं (डेकागन/दसकोणीय) वाली तरंग। यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने शनि के दक्षिणी गोलार्ध में इतनी बड़ी और नियमित आकार की जेट स्ट्रीम संरचना देखी है। यह संरचना शनि के उत्तरी ध्रुव पर स्थित प्रसिद्ध षट्कोण (हेक्सागन) से काफी मिलती-जुलती है, लेकिन इसके प्रमुख अंतर यह दर्शाते हैं कि शोधकर्ता एक बिल्कुल नई और विशिष्ट वायुमंडलीय घटना को आकार लेते हुए देख रहे हैं। यह अध्ययन प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका साइंस एडवांसेस में प्रकाशित हुआ है।
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शनि पर एक नए पैटर्न का उभार शोधकर्ताओं ने वर्ष 2023 से हबल द्वारा ली गई तस्वीरों का विश्लेषण करके इस आकृति के विकास का पुनर्निर्माण किया। शुरुआती तस्वीरों में इसके स्पष्ट होने से पहले धुंधले संकेत मिले थे। यह अवलोकन हबल के आउटर प्लैनेट एटमॉस्फियर लेगेसी (ओपल) कार्यक्रम का हिस्सा था।
नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर की वैज्ञानिक एमी साइमन ने बताया, हमने शनि के दक्षिणी गोलार्ध में ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। उत्तरी षट्कोण पिछले 40 से अधिक वर्षों से वहीं मौजूद है, लेकिन यह आकृति अलग है — यह समय के साथ मजबूत होती दिख रही है, जिससे हमें एक विशाल वायुमंडलीय पैटर्न को बनते देखने का दुर्लभ अवसर मिला है।
शौकिया खगोलशास्त्रियों का योगदान स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ द बास्क कंट्री के शोधकर्ता अगस्टिन सांचेज़-लावेगा और शौकिया खगोलशास्त्री ट्रेवर बैरी व जीन-पॉल ओगर ने 2024 की छवियों में इस लहरदार पट्टी को पहचाना। 2025 के आंकड़ों ने इसके 10 भुजाओं वाला डेकागन होने की पुष्टि की। इसके बाद हबल के माध्यम से अधिक स्पष्ट और विस्तृत तस्वीरें ली गईं।
गहरा वायुमंडलीय ढांचा यह नई तरंग शनि की शक्तिशाली जेट स्ट्रीम के भीतर स्थित है। अवलोकन दर्शाते हैं कि यह केवल बादलों की ऊपरी परत तक सीमित नहीं है, बल्कि वातावरण की कई परतों में गहराई तक फैली हुई है।
वैज्ञानिक अभी भी यह नहीं समझ पाए हैं कि इस डेकागन की शुरुआत किस कारण से हुई और क्या यह लंबे समय तक स्थिर रहेगा। हबल, जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप और कंप्यूटर मॉडलिंग के जरिए इसकी उत्पत्ति और जीवनकाल का पता लगाने का प्रयास जारी रहेगा। भविष्य के ये निष्कर्ष न केवल विशाल ग्रहों के वातावरण को समझने में मदद करेंगे, बल्कि पृथ्वी के वायुमंडलीय गतिशास्त्र को समझने में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
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