नीचे से विशाल सुपरप्लूम इसे तोड़ रहा है
पूर्वी अफ्रीका के नीचे हो रही है हलचल
अंदर का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है
कंप्यूटर मॉडल ने इस गुत्थी को सुलझाया
राष्ट्रीय खबर
रांचीः अफ्रीका महाद्वीप के टूटने की चर्चा काफी पहले से हैं। इसका विस्तृत अध्ययन कर लेने के बाद वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल के माध्यम से पूर्वी अफ़्रीकी रिफ्ट प्रणाली के नीचे हो रहे भू-गर्भीय विरूपण के एक रहस्यमयी पैटर्न की व्याख्या की है। शोध के अनुसार, पृथ्वी की गहराई में स्थित गर्म मैंटल पदार्थ का एक विशाल गुबार, जिसे अफ़्रीकी सुपरप्लूम कहा जाता है, इस अनोखी हलचल के लिए ज़िम्मेदार है। यह हलचल भ्रंश के समानांतर चलने के साथ-साथ गहराई में चट्टानों से गुज़रने वाली भूकंपीय तरंगों के पैटर्न को भी प्रभावित कर रही है।
देखें अफ्रीका टूटने पर बना पुराना वीडियो
https://youtu.be/s700bpHwQgM
जब पृथ्वी की बाहरी कठोर परत खिंचकर पतली होने लगती है, तो महाद्वीपीय टूट की प्रक्रिया शुरू होती है। सतह के पास तनाव के कारण चट्टानें टूटती हैं, जिससे हलचल होती है और भूकंप आते हैं, जबकि गहराई में अत्यधिक तापमान के कारण पदार्थ धीरे-धीरे मुड़ता है। वर्जीनिया टेक की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सारा स्टैम्प्स के अनुसार, स्थलखंड का व्यवहार सिली पुटी की तरह होता है—झटके से यह टूट जाता है, लेकिन धीरे-धीरे खींचने पर यह फैलता है।
सामान्य भ्रंश क्षेत्रों में हलचल भ्रंश के लंबवत होती है, लेकिन 12 वर्षों से अधिक के जीपीएस आंकड़ों के विश्लेषण से स्टैम्प्स ने पाया कि पूर्वी अफ़्रीका में हलचल भ्रंश के समानांतर भी हो रही है। इस पहेली को सुलझाने के लिए न्यू मेक्सिको टेक के शोधकर्ता ताहिरी राजाओनारिसन ने थ्री डी थर्मोमैकेनिकल मॉडल तैयार किए।
इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि भ्रंश के समानांतर हो रही यह हलचल अफ़्रीकी सुपरप्लूम से जुड़े उत्तर दिशा की ओर मैंटल के प्रवाह के कारण है। यह सुपरप्लूम दक्षिण-पश्चिम अफ़्रीका की गहराई से शुरू होकर उत्तर-पूर्व की ओर फैलता है और ऊपर की ओर बढ़ता है। यह अध्ययन महाद्वीपीय भ्रंश के पीछे काम करने वाले बलों की पुरानी बहस में नया मोड़ लाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यहाँ दो मुख्य बल काम कर रहे हैं। स्थलखंडीय उत्प्लावकता बल जो सतह के पास ऊंचाई और घनत्व के अंतर से उत्पन्न होता है और भ्रंश के लंबवत खिंचाव के लिए ज़िम्मेदार है। मैंटल कर्षण बल पृथ्वी की गहराई में प्रवाहित मैंटल के कारण ऊपरी परत पर लगने वाला बल है। सुपरप्लूम के इस प्रवाह से चट्टानों में भूकंपीय गतिविधियां भी उत्पन्न हो रही है, जिससे अलग-अलग दिशाओं में भूकंपीय तरंगों की गति बदल जाती है। यह खोज साबित करती है कि महाद्वीपों के टूटने की प्रक्रिया में केवल एक बल नहीं, बल्कि सतह के निकट के खिंचाव और गहराई में बहने वाले मैंटल प्रवाह की जटिल आपसी क्रिया शामिल है।
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