माकपा ने कहा बंगाल की संस्कृति पर चोट पहुंचा रहे हैं
फरमान है कि पंडाल के पास नॉन वेज नहीं
माकपा ने कहा संस्कृति को बिगाड़ रहे हैं
लोगों तो उत्सव मनाने का अपना हक है
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः माकपा ने विश्व हिंदू परिषद पर पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के आयोजन के तरीकों को तय करने और त्योहार की मूल भावना को आघात पहुंचाने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। यह प्रतिक्रिया वीएचपी की उस आपत्ति के बाद आई है, जिसमें संगठन ने प्रतिमाओं के विकृत रूप और पूर्व की दुर्गा पूजा थीमों पर सवाल उठाते हुए आयोजकों से पारंपरिक अनुष्ठानों का पालन करने तथा पूजा पंडालों के आसपास मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया था।
कल्याणी में माकपा की पश्चिम बंगाल राज्य समिति की दो दिवसीय विस्तारित बैठक के पहले दिन पत्रकारों को संबोधित करते हुए राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने अपने निशाने पर भारतीय जनता पार्टी सरकार को भी लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार, बेहतर शिक्षा, उद्योग और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के वादों को पूरा करने के बजाय धार्मिक शुद्धिकरण की राजनीति पर उतर आई है। सलीम ने कहा कि बंगाली दुर्गा पूजा कैसे मनाएंगे, यह तय करने का ठेका वीएचपी ने अपने हाथ में ले लिया है और वे पंडालों के पास मांसाहारी भोजन पर रोक लगाने की बात कर उत्सव के उत्साह को नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता को यह तय करना होगा कि उन्होंने इस सरकार को रोजगार और उद्योगों के लिए चुना था या इन सब के लिए।
सलीम ने सरकार पर समाज के गरीब तबकों, फेरीवालों और बेघर लोगों के खिलाफ युद्ध की घोषणा करने का आरोप लगाया। उन्होंने सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने के अभियानों का जिक्र किया, जिसके तहत हाल ही में पार्क स्ट्रीट में फुटपाथ पर बच्चे के लिए दूध गर्म कर रही महिला को मंत्री अग्निमित्रा पॉल द्वारा फटकार लगाए जाने पर विवाद खड़ा हुआ था (जिसके बाद मुख्यमंत्री शुभेंद्रु अधिकारी ने महिला से मुलाकात कर सहायता का आश्वासन दिया था)। सलीम ने आरोप लगाया कि भाजपा ने तीन महीने पहले सत्ता में आने पर रोजगार, औद्योगीकरण और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के वादे किए थे, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ है।
पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार से तुलना करते हुए सलीम ने कहा कि पिछली सरकार के समय भी इसी तरह की पाबंदियां और अभिव्यक्ति की आजादी का दमन देखने को मिलता था, जहां सरकारी पुस्तकालयों के लिए समाचार पत्रों और किताबों तक का निर्धारण सरकार करती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जाधवपुर विश्वविद्यालय जैसे बौद्धिक संस्थानों और वैचारिक सोच पर हमले किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, मोहम्मद सलीम ने वाममोर्चा की पराजय के बाद नवंबर 2011 में हुए माओवादी नेता किशेनजी के एनकाउंटर की न्यायिक जांच कराने की मांग भी दोहराई।