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अमित शाह और संबित पात्रा की उत्तर पूर्व में खेल जारी

मेघालय के सात विधायक भाजपा में आयेंगे

यूडीपी के विधायक हैं सभी लोग

पहले नौ विधायकों की चर्चा थी

राज्य में भाजपा की ताकत बढ़ेगी

उत्तर पूर्व संवाददाता

गुवाहाटीः मेघालय की सत्ताधारी गठबंधन सरकार में एक बार फिर बड़े राजनीतिक उलटफेर की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ऐसी प्रबल राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के कुल 12 विधायकों में से 9 विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने या पार्टी का विलय करने की योजना पर विचार कर रहे हैं। यदि यह कदम आधिकारिक रूप से आकार लेता है, तो यह केवल एक साधारण दलबदल नहीं होगा, बल्कि यह राज्य विधानसभा में सत्ता के संतुलन को पुनर्गठित कर सकता है और भाजपा की स्थिति को अभूतपूर्व रूप से मजबूत कर सकता है। इन विधायकों को अमित शाह से मिलने की फोटो भी सार्वजनिक हुई है।

पिछले कुछ दिनों से राज्य के राजनीतिक गलियारों में यह हलचल काफी तेज हो गई है। हाल ही में वरिष्ठ भाजपा विधायक अलेक्जेंडर लालू हेक द्वारा दिए गए उस बयान को इससे जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कई वर्तमान विधायकों सहित अनेक नेता भाजपा के संपर्क में हैं। हालांकि अभी तक इस कदम की कोई आधिकारिक या औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यूडीपी के भीतर बढ़ती आंतरिक कलह और असंतोष ने इस राजनीतिक पुनर्गठन की संभावनाओं को और बल दे दिया है। अब मुख्य सवाल केवल यह नहीं है कि संख्याबल पर्याप्त है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या यह फैसला अभी लिया जाएगा।

चूंकि यूडीपी के 12 में से 9 विधायक असंतुष्ट खेमे में बताए जा रहे हैं, इसलिए यदि वे एक साथ कोई सामूहिक कदम उठाते हैं तो दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता पर कोई खतरा नहीं आएगा और इसका सीधा असर सत्ताधारी मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस) के आंतरिक समीकरणों पर पड़ेगा। असंतुष्ट खेमे के एक विधायक ने इस कदम के जल्द पूरा होने की ओर इशारा करते हुए कहा, यदि यह होना है, तो यह तुरंत होगा। इस टिप्पणी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तीव्र कर दिया है। वर्तमान में 60 सीटों वाली मेघालय विधानसभा में यूडीपी के 12 विधायक हैं और भाजपा के पास केवल 2 विधायक हैं। यदि 9 विधायकों का यह समूह भाजपा में शामिल होता है, तो विधानसभा में भाजपा का संख्याबल बढ़कर 11 हो जाएगा, जिससे गठबंधन के भीतर उसकी सौदेबाजी की क्षमता काफी बढ़ जाएगी। फिलहाल सभी की निगाहें यूडीपी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।