अमेरिका के 29 राज्यों ने चेतावनी के बाद कड़ाई कर दी
वाशिंगटनः सोशल मीडिया दिग्गज मेटा पर कानूनी संकट गहरा गया है। अमेरिका के 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने सामूहिक रूप से मेटा के खिलाफ एक ऐतिहासिक मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों ने आरोप लगाया है कि कंपनी का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम जानबूझकर बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और मेटा ने इन नकारात्मक प्रभावों को जनता और अभिभावकों से छिपाकर रखा है। इस गंभीर आरोप के साथ ही, इन राज्यों ने मेटा पर 200 अरब डॉलर के भारी-भरकम जुर्माने की मांग की है।
मुकदमे का आधार और मुख्य आरोप दायर किए गए मुकदमे में कहा गया है कि मेटा के प्लेटफॉर्म—विशेषकर इंस्टाग्राम—इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि वे बच्चों को एडिक्टिव (लत लगाने वाले) बना देते हैं। अटॉर्नी जनरलों का तर्क है कि इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम किशोरों को ऐसी सामग्री की ओर धकेलता है जो उनके आत्म-सम्मान, शरीर की छवि और मानसिक शांति पर बुरा असर डालती है।
मुकदमे में यह भी आरोप लगाया गया है कि मेटा के पास स्वयं के आंतरिक शोध और डेटा मौजूद थे, जिनसे यह साबित होता था कि उनका प्लेटफॉर्म युवा उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन कंपनी ने अपने मुनाफे के लिए इन तथ्यों को लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं होने दिया। राज्यों का दावा है कि मेटा ने युवाओं की सुरक्षा के बजाय अपनी व्यापारिक वृद्धि को प्राथमिकता दी है।
मेटा का बचाव और कानूनी लड़ाई मेटा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए एक आधिकारिक बयान में कहा है कि वे युवा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। कंपनी का कहना है कि वे पहले से ही किशोरों के लिए कई सुरक्षा फीचर्स और पैरेंटल कंट्रोल टूल्स उपलब्ध करा रहे हैं। मेटा ने इसे तकनीकी और जटिल समस्या बताते हुए मुकदमे को निराधार करार दिया है।
यह मामला अमेरिकी तकनीकी इतिहास के सबसे बड़े कानूनी संघर्षों में से एक माना जा रहा है। 200 अरब डॉलर का जुर्माना न केवल मेटा के वित्तीय ढांचे के लिए एक बड़ा झटका होगा, बल्कि यह सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि अब डिजिटल स्पेस में बच्चों की सुरक्षा पर किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले समय में यह लड़ाई अदालतों में लंबी खिंच सकती है, जो भविष्य में सोशल मीडिया के नियमन को पूरी तरह बदल सकती है।