अमेरिका के खिलाफ तनकर खड़ी है ईरान की वर्तमान सरकार
दुबईः वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लौटने की उम्मीदों को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले जाने को लेकर ईरान की तरफ से नई मांगें सामने आईं। इन अड़चनों और बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में सोमवार को एक प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। तेहरान के इस जिद पर अड़े रहने से कि अमेरिका की तरफ से भारी रियायतें मिलने तक इस बेहद अहम जलमार्ग को दोबारा नहीं खोला जाएगा, वैश्विक ऊर्जा बाजार में निवेशकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। सोमवार को जीएमटी समयानुसार सुबह 7:30 बजे अक्टूबर डिलीवरी वाले ब्रेंट फ्यूचर्स के दाम 0.7 प्रतिशत की तेजी के साथ 84.11 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए।
इन ताज़ा बढ़त के बाद, अमेरिका और इजराइल के ईरान के साथ युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में वैश्विक बेंचमार्क लगभग 16 प्रतिशत ऊपर चल रहा है। सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) स्थित केसीएम ट्रेड के मुख्य बाजार विश्लेषक टिम वाटरर ने अलजेज़ीरा को बताया, किसी भी ठोस प्रगति का अभाव और किसी समझौते के व्यावहारिक विवरण को लेकर मन में बने अनसुलझे सवाल तेल की कीमतों में एक रिस्क प्रीमियम बनाए हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि बिना किसी बड़ी सफलता के बीत रहा प्रत्येक दिन व्यापारियों को और अधिक सतर्क और चौकस बना रहा है।
विदित हो कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने रविवार को यह बयान दिया था कि हालांकि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलमार्ग को लेकर एक समझौते पर सहमति बनने के आसार करीब हैं, लेकिन यह जलमार्ग तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक वाशिंगटन कुछ खास शर्तों को पूरा नहीं करता। इन शर्तों में तेहरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और युद्ध की भरपाई के रूप में हर्जाना देना शामिल है।
युद्ध की शुरुआत से पहले इस जलडमरूमध्य से दुनिया भर की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था, लेकिन फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से यहां जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो चुकी है। यह इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा व्यवधान की घटनाओं में से एक है। शिप-ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों के मुताबिक, 4, 5 और 6 अगस्त को इस जलमार्ग से केवल 8 से 15 जहाजों ने ही आवागमन किया, जबकि संघर्ष से पहले यहां रोजाना औसतन 130 जहाज गुजरते थे।
भले ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का एक बुनियादी सिद्धांत नौवहन की स्वतंत्रता है, इसके बावजूद ईरान लगातार इस जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के अपने अधिकार पर अड़ा हुआ है। इतना ही नहीं, ईरान ने उन सभी व्यावसायिक जहाजों पर हमला करने की धमकी भी दी है जो बिना उसकी पूर्व अनुमति वाले मार्गों से इस रास्ते को पार करने का दुस्साहस करते हैं।