किरेण रिजिजू से कहा गृह मंत्री तक संदेश पहुंचाएं
अनुपस्थिति को लेकर रोज सवाल उठ रहे
परिसर में दिख रहे हैं पर सदन के भीतर नहीं
पुलिस बर्बरता पर विपक्ष जवाब मांग रहा है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः दिल्ली में पिछले महीने हुए व्यापक छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस बर्बरता और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। इसी बीच, गुरुवार को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से कहा कि वे विपक्ष की भावनाओं को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचाएं। यह गतिरोध पिछले दो सप्ताह से जारी है, जहां विपक्ष पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए जुलाई के प्रदर्शनों पर गृह मंत्री से सदन में आधिकारिक बयान देने की लगातार मांग कर रहा है।
राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया। खड़गे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि विपक्ष लगातार गृह मंत्री और प्रधानमंत्री से सदन में आने और इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा में शामिल होने का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने सभापति से यह भी आग्रह किया कि वे गृह मंत्री को सदन में आकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दें। अपनी बात को बल देने के लिए खड़गे ने दिवंगत वित्त मंत्री अरुण जेटली के उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध या व्यवधान भी संसद का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन जब विपक्ष जनता से जुड़े वास्तविक और गंभीर सवाल पूछ रहा है, तो सरकार के प्रतिनिधि सदन से किनारा कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से पहले सदन में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस गतिरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह आगामी 12 अगस्त को प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर होने वाली बहस का जवाब देने के दौरान इन तमाम मुद्दों पर सरकार का पक्ष रख सकते हैं। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात के बाद इस संभावित तिथि के संकेत दिए थे। बहरहाल, संसद के इस मानसून सत्र में छात्र विरोध प्रदर्शनों की गूंज और सदन के भीतर का यह राजनीतिक टकराव चरम पर बना हुआ है, जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवादहीनता को पाटने के लिए सभापति का यह निर्देश एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।