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बी सिल्क प्लास्टिक का क्रांतिकारी और टिकाऊ विकल्प, देखें वीडियो

क्या आप जानते हैं यह उपलब्धि

प्रकृति की मदद से प्रदूषण कम करने में वैज्ञानिकों ने खोजा नया रास्ता

प्रयोगशाला में विकसित हुआ है पदार्थ

मकड़ी के जाले से भी अधिक मजबूत

प्रकृति में खुद ही विघटित हो जाता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः पर्यावरण संरक्षण की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में एक नया पदार्थ विकसित किया है, जिसे बी सिल्क का नाम दिया गया है। यह पदार्थ मधुमक्खी के रेशम (जो उनके छत्तों को मजबूती प्रदान करता है) की आणविक संरचना पर आधारित है। पिछले कुछ वर्षों से वैज्ञानिक प्लास्टिक के ऐसे विकल्प की तलाश में थे, जो न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित हो, बल्कि औद्योगिक रूप से टिकाऊ भी हो।

बी सिल्क की विशेषताएं और महत्व: वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह नया पदार्थ मकड़ी के जाले के रेशम की तुलना में अधिक लचीला और मजबूत होने की क्षमता रखता है। प्लास्टिक के विपरीत, यह पदार्थ पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल (जैव-निम्नीकरणीय) है। इसका अर्थ यह है कि प्रकृति में यह सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से विघटित हो जाता है, जिससे मिट्टी या जल निकायों में प्रदूषण का खतरा नहीं रहता।

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इस शोध की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बड़े पैमाने पर बायो-फैब्रिकेशन प्रक्रिया के माध्यम से बनाया जा सकता है। वर्तमान प्लास्टिक उद्योग में उपयोग होने वाले पॉलिमर्स की तुलना में इसका उत्पादन कार्बन फुटप्रिंट को काफी हद तक कम कर सकता है। प्रयोगशाला परीक्षणों में यह पाया गया है कि बी सिल्क अत्यधिक तापमान और दबाव को सहने की क्षमता रखता है, जिससे इसे पैकेजिंग, कपड़ा उद्योग और चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग किया जा सकता है।

पर्यावरण पर प्रभाव: प्रतिवर्ष दुनिया भर में लाखों टन प्लास्टिक कचरा महासागरों और लैंडफिल में जमा हो जाता है, जो समुद्री जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए घातक है। बी सिल्क जैसे पदार्थ न केवल प्लास्टिक की निर्भरता को कम करेंगे, बल्कि एक सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) को बढ़ावा देंगे। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इस तकनीक का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाता है, तो यह आने वाले दशक में प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी साधन साबित होगा। वर्तमान में, शोधकर्ता इसके उत्पादन की लागत को कम करने पर काम कर रहे हैं ताकि इसे आम जनता के लिए किफायती बनाया जा सके।

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