नूरमहल आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव की धूम! 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आशुतोष महाराज जी के चरणों में टेका माथा
नूरमहल (पंजाब): युगद्रष्टा, ब्रह्मज्ञान प्रदाता एवं संपूर्ण मानवता के आध्यात्मिक पथ-प्रदर्शक सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की पावन प्रेरणा एवं दिव्य मार्गदर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) के नूरमहल आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ सर्वश्री आशुतोष महाराज जी के ब्रह्मज्ञानी शिष्यों एवं शिष्याओं द्वारा पूरे लयबद्ध तरीके से किए गए वैदिक मंत्रों के पवित्र उच्चारण से हुआ। इन वेद मंत्रों की दिव्य तरंगों ने संपूर्ण वातावरण को अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सकारात्मकता से ओतप्रोत कर दिया। इसके बाद साध्वी तपस्विनी भारती जी ने मंच संचालन की कमान संभालते हुए देश-विदेश से पधारे 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया। महोत्सव के दौरान विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव और प्रत्येक जीव के कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थनाएं की गईं। तत्पश्चात आशुतोष महाराज जी की दिव्य आरती एवं पूजन संपन्न हुआ।
🙏 “गुरु की आज्ञा में अडिग रहना ही सच्चा समर्पण”: साध्वी वैष्णवी भारती जी का आत्म-परीक्षण का संदेश
आध्यात्मिक प्रवचनों की श्रृंखला में साध्वी वैष्णवी भारती जी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व हम सभी के लिए आत्म-परीक्षण और आत्ममंथन करने का एक अनमोल अवसर है।
यह पर्व हमें यह सोचने की प्रेरणा देता है कि बीते 365 दिनों में क्या हम गुरुदेव की आज्ञा में दृढ़ता से टिके रह पाए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा व श्रद्धा केवल बाहरी आडंबरों, शब्दों या पुष्प अर्पित करने तक सीमित नहीं होती। वास्तविक समर्पण तब सिद्ध होता है, जब शिष्य अपने गुरुदेव के विचारों, मर्यादाओं एवं आध्यात्मिक सिद्धांतों को पूर्णतः अपने जीवन और आचरण में उतारता है।
📖 गुरु वचनों पर चलना ही वास्तविक पूजा: स्वामी मोहनपुरी जी एवं साध्वी मानस्विनी भारती जी
स्वामी मोहनपुरी जी ने अपने विचारों में कहा कि गुरु के वचनों को सहर्ष स्वीकार करना, उनके निर्देशों के अनुरूप स्वयं को ढालना तथा जीवन के हर मोड़ पर सत्य के मार्ग पर अडिग रहना ही सच्ची गुरु-पूजा है।
वहीं वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए साध्वी मानस्विनी भारती जी ने संदेश दिया— “कुटिल चाल कलिकाल चल रहा, युग की गति पहचानो।” उन्होंने कहा कि आज विश्व स्तर पर युद्ध, प्राकृतिक असंतुलन और समाज में घटते नैतिक मूल्य चिंता का विषय हैं। ऐसे समय में एक जागृत साधक घबराने के बजाय अपने गुरु के मार्गदर्शन, साधना और विवेक के बल पर स्वयं को हर दुष्प्रभाव से सुरक्षित रखता है।
🌸 भक्तिमय भजनों से झूमे श्रद्धालु, देश-विदेश के वीवीआईपी (VVIP) अतिथियों ने भी दर्ज कराई उपस्थिति
कार्यक्रम के अगले चरण में स्वामी सज्जनानंद जी ने मंच का सफल संचालन करते हुए नूरमहल आश्रम की अलौकिक महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं से निरंतर सत्संग, आश्रम और गुरु-सेवा कार्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
सत्संग के बीच प्रस्तुत किए गए पंजाबी भक्ति भजन “सब ने भंगड़ा पाऊणा” ने पूरे परिसर को भक्तिमय उत्साह से सराबोर कर दिया और श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए। इस परम पावन अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों व विदेशों से पहुंचे आम श्रद्धालुओं के अलावा कई गणमान्य वीवीआईपी (VVIP) अतिथियों ने भी विशेष रूप से उपस्थित होकर गुरु चरणों में अपना नमन निवेदित किया।