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अब पत्थरों वाले ट्रक पर पुलिस का बयान आया

पहले ही वीडियो में खुल गया था इस लावारिश ट्रक का राज

सोशल मीडिया पर पहले ही दिख गया था

अब ट्रक को अपने हवाले होने का दावा किया

अलग अलग जगहों पर दिखने से सवाल खड़ा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई को संसद मार्च से ठीक पहले दिल्ली के जंतर-मंतर के पास पत्थरों से लदा जो ट्रक खड़ा पाया गया था, उसे दिल्ली पुलिस ने चार दिन पहले ही ज़ब्त कर लिया था। रिपोर्ट का दावा है कि जब यह ट्रक विरोध स्थल पर और बाद में इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यालय के बाहर दिखाई दिया, तब यह कथित तौर पर पुलिस हिरासत में था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन दावों को झूठा और भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है कि ट्रक को जानबूझकर जंतर-मंतर या किसी राजनीतिक दल के कार्यालय के पास तैनात किया गया था।

घटनाक्रम के अनुसार, 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध स्थल के पास पत्थरों से भरे ट्रक की ओर इशारा किया था। उन्होंने दिल्ली पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा था कि ट्रक पुलिस घेरे को तोड़कर वहां कैसे पहुंचा। दीपके ने अंदेशा जताया था कि इसका इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों को फंसाने या हिंसा भड़काने के लिए किया जा सकता था। उस समय पुलिस ने उनके सवालों का जवाब नहीं दिया था। इसके बाद, 25 जुलाई को रायसीना रोड स्थित IYC कार्यालय के बाहर भी वही ट्रक खड़ा मिला। रिपोर्टों के अनुसार, यह ट्रक 21 जुलाई से ही वहां पार्क था और युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने भी कई दिनों तक कार्यालय के बाहर खड़े इस ट्रक पर सवाल उठाए थे।

रिपोर्ट में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया गया है कि 16 जुलाई को फिरोज़ शाह रोड-कस्तूरबा गांधी मार्ग क्रॉसिंग पर एक वैन से टकराने के बाद दिल्ली पुलिस ने पत्थरों से लदे इस ट्रक को अपनी हिरासत में ले लिया था। दुर्घटना के बाद दोनों वाहनों को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के भंडारण सुविधा में लाया गया था। रिपोर्ट में संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि ट्रक 20 जुलाई तक पुलिस स्टेशन के ठीक बाहर खड़ा था। विरोध स्थल पर इसके खड़े होने का वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस कथित तौर पर ट्रक को भलस्वा ले गई, उसे खाली किया, और फिर वापस लाकर उसी स्थान पर पार्क कर दिया।

हालांकि, दुर्घटना की जांच कर रहे अधिकारी ने एक अलग विवरण दिया। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के कारण ट्रक को शुरू में स्थानांतरित किया गया था और वीडियो वायरल होने के बाद यह मालखाने में ही रहा। वह अधिकारी इस सवाल का जवाब नहीं दे सके कि ट्रक युवा कांग्रेस कार्यालय तक कैसे पहुंचा। इस मामले में संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के एसएचओ द्वारा एक तीसरा बयान भी दिया गया है।