Jaipur News: पैसे जमा करने के महीनों बाद भी नहीं मिला कनेक्शन, किराए की बैटरी से रहने को मजबूर परिवार
राजस्थान की राजधानी जयपुर के कालवाड़ क्षेत्र में विद्युत निगम (JVVNL) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग के ऑनलाइन सिस्टम और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर ने सबको हैरान कर दिया है। बिजली के नए कनेक्शन के लिए पैसे जमा कराने के महीनों बाद भी उपभोक्ता के घर न तो एक इंच तार खींचा गया और न ही मीटर लगा, लेकिन सिस्टम में कनेक्शन को ‘चालू’ दिखाकर पहला बिजली बिल भी जारी कर दिया गया।
📄 महीनों चक्कर काटने के बाद भी नहीं मिला समाधान
कालवाड़ निवासी महेंद्र शर्मा ने अप्रैल माह में नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। विभाग द्वारा 28 अप्रैल 2026 को जारी 14,750 रुपये का डिमांड नोट उन्होंने 29 अप्रैल को जमा कर दिया था। नियमों के मुताबिक भुगतान के बाद तुरंत लाइन खींचकर मीटर लगना चाहिए था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। हालांकि, 27 जून 2026 को डिस्कॉम ने सिस्टम में कनेक्शन चालू मानकर जीरो रीडिंग का 19.50 रुपये का बिल भेज दिया।
🔋 किराए की बैटरी से रोशनी करने को मजबूर परिवार
इस लापरवाही का शिकार केवल महेंद्र शर्मा ही नहीं, बल्कि माचवा (अशोक वाटिका) निवासी मेवा बाई भी हुई हैं। उन्होंने 14 जून 2026 को 11,720 रुपये का डिमांड नोट जमा किया था। परिवार कई बार ऑफिस के चक्कर काट चुका है, लेकिन हर बार ‘मीटर और केबल न होने’ का बहाना बनाकर उन्हें टरका दिया जाता है। नतीजा यह है कि यह परिवार पिछले एक महीने से किराए की बैटरी लाकर घर में उजाला करने को विवश है।
🔍 एईएन ने दिए जांच और कार्रवाई के आदेश
पैसे वसूलने में मिनटों का समय लगाने वाला विभाग कनेक्शन देने में महीनों लगा रहा है, जिससे ऑनलाइन पोर्टल की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मामले पर कालवाड़ डिस्कॉम के एईएन मनोज सिंह बिष्ट ने कहा कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है और पूरे मामले की फाइलों की गहन जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जांच के बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।