बिना वर्दी और बिना नेमप्लेट वाले पुरुषों पर विवाद
जंतर-मंतर में पुलिस की बर्बरता पर खड़े हो गये हैं सवाल
नई दिल्लीः जंतर-मंतर से आई तस्वीरों ने पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और जवाबदेही पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज और धक्का-मुक्की के बीच, यह गंभीर आरोप सामने आए हैं कि कार्रवाई में शामिल कई व्यक्ति बिना नेमप्लेट या अधूरी वर्दी में थे। इस स्थिति ने प्रदर्शनकारियों और विपक्ष को यह पूछने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर बल प्रयोग करने वाले ये अज्ञात लोग कौन थे?
सोमवार को हुए इन हिंसक टकरावों के बाद प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि पहचान रहित कर्मियों ने महिलाओं सहित शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया। सूत्रों के अनुसार, सोमवार के प्रदर्शन के दौरान घायल हुई एक युवती को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। यह युवती उन हजारों CJP समर्थकों में शामिल थी, जो कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए संसद की ओर मार्च करने का प्रयास कर रहे थे।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस झड़प में 118 पुलिसकर्मी और 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। वहीं कई प्रदर्शनकारियों का दावा है कि लाठियां भांजने वाले कुछ लोग सिविल ड्रेस (जींस और सफेद शर्ट) में थे और उन पर कोई पहचान पत्र (आईडी कार्ड) नहीं था। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इन अज्ञात कर्मियों ने निर्दोष छात्रों पर लाठियां बरसाईं। CJP प्रदर्शनकारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए सवाल उठाया कि क्या ये लोग अधिकृत कर्मी थे और इन्हें किसने तैनात किया था?
CJP नेता अभिजीत दीपके ने कहा कि कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने शांति का मार्ग चुना है और यह आंदोलन जारी रहेगा। बाद में कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर लौटकर नष्ट किए गए विरोध स्थल को दोबारा स्थापित किया। इसके अलावा, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कथित तौर पर एक्सपायर्ड (समय सीमा समाप्त) आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करने के आरोपों ने विवाद को और गहरा दिया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने भी सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से इस घटना की जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके कर्मियों ने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की थी।