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सोनम वांगचुक के आमरण अनशन पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

केंद्र और दिल्ली सरकार से तुरंत मांगा जवाब

  • सरकार से तुरंत उत्तर मांगा गया है

  • राकेश सैन  का याचिका पर सुनवाई

  • गुरुवार को इसपर फिर चर्चा होगी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे देश के प्रसिद्ध पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। बुधवार को अदालत ने वांगचुक की जान बचाने के लिए तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस मामले को बेहद गंभीर और आपातकालीन बताते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को कल तक अपना रुख स्पष्ट करने का कड़ा निर्देश दिया है।

यह याचिका अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर की गई है। अदालत में मामले की पैरवी करते हुए उन्होंने दलील दी कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है जहां एक सामाजिक कार्यकर्ता लोकतांत्रिक तरीके से अपने मौलिक अधिकारों का प्रयोग कर विरोध प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण उनकी जान पर बन आई है। वे देश के सामने धीरे-धीरे मौत के मुंह में जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि वांगचुक को तुरंत किसी सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए और उनके शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों, खनिजों और विटामिनों की कमी को दूर करने के लिए उन्हें तरल आहार दी जाए, ताकि उनके जीवन की रक्षा की जा सके।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील की अनुपस्थिति का संज्ञान लेते हुए खंडपीठ ने मामले को कल के लिए सूचीबद्ध कर दिया। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वे इस आदेश की प्रति तुरंत केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और दिल्ली सरकार के सिविल स्टैंडिंग काउंसिल को सौंपें ताकि वे कल आवश्यक दिशा-निर्देशों के साथ कोर्ट में उपस्थित रह सकें।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं और पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं।इस बीच उनकी सेहत काफी बिगड़ी है। जिसे लेकर देश भर में चिंता व्यक्त की जा रही है।