वार्ता जारी रखने के कूटनीतिक प्रयासों के बीच तनाव
एजेंसियां
रियादः मंगलवार को फारस की खाड़ी का क्षेत्र एक बार फिर सैन्य हलचल और तनाव का केंद्र बन गया। ईरानी राज्य मीडिया के अनुसार, ईरान के महत्वपूर्ण किश द्वीप पर स्थित एक जल और बिजली संयंत्र के पास एक अमेरिकी प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या गोला) में विस्फोट हुआ। इसी समय, रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी फार्स न्यूज एजेंसी ने ईरान के केशम द्वीप पर भी विस्फोटों की आवाजें सुनाई देने का दावा किया है।
इस तनाव की गूंज पड़ोसी देशों में भी साफ देखी गई। कुवैत के सशस्त्र बलों ने घोषणा की है कि वे अपने हवाई क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन खतरों जैसे शत्रुतापूर्ण हवाई लक्ष्यों का मुकाबला कर रहे हैं। वहीं, बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने देश में रॉकेट हमले के सायरन बजने की सूचना दी है।
इन घटनाओं के पीछे अमेरिकी सैन्य रणनीति का एक स्पष्ट पैटर्न नजर आ रहा है। एक सूत्र ने द जेरूसलम पोस्ट को बताया कि अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी के पास स्थित उन ईरानी खतरों और हथियार प्रणालियों को निशाना बना रही है, जो जहाजों को लक्ष्य बना सकती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका अभी तक ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचे, बड़े कमांड-एंड-कंट्रोल केंद्रों और वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाने से बच रहा है।
यह सैन्य कार्रवाई ईरान पर मंगलवार रात 11 बजे (इजराइल समयानुसार) से शुरू होने वाले अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी से ठीक पहले की गई है। एक अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया है, कोई भी जहाज न तो ईरान से बाहर जा सकेगा और न ही अंदर आ सकेगा।
हालांकि, इस कठोर सैन्य रुख के बावजूद, वाशिंगटन के गलियारों से कूटनीति के संकेत भी मिल रहे हैं। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन अभी भी तेहरान को संदेश भेज रहा है कि बातचीत का विकल्प खुला है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को इस मामले पर नरम रुख अपनाते हुए कूटनीति की गुंजाइश बनाए रखने के संकेत दिए हैं। यह देखना बाकी है कि यह सैन्य दबाव ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में सफल होता है या क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की ओर धकेलता है।