अमेरिकी प्रतिबंधों से हलाकान है यह अमेरिकी देश
एजेंसियां
हवानाः क्यूबा एक बार फिर गंभीर ऊर्जा संकट की चपेट में है। देश की सरकारी बिजली कंपनी, यूएनई इलेक्ट्रिका के अनुसार, मंगलवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 11:05 बजे पूरे देश का पावर ग्रिड ठप हो गया, जिससे एक बार फिर संपूर्ण राष्ट्र अंधेरे में डूब गया। यह पिछले 10 दिनों में तीसरा और वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक का पांचवां पूर्ण ब्लैकआउट है। अधिकारियों ने अभी तक ग्रिड के विफल होने का कोई ठोस कारण स्पष्ट नहीं किया है।
इस संकट से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। हवाना और अन्य प्रांतों के निवासियों में गहरा रोष और हताशा है। 62 वर्षीय मारिया कैरिदाद अल्वारेज़ जैसी गृहिणियों के लिए यह स्थिति असहनीय हो गई है, जिनका कहना है कि बार-बार बिजली जाने से कोई समाधान नजर नहीं आता। वहीं, बुजुर्ग नागरिक रेफ्रिजरेटर में रखे सामान के खराब होने की चिंता जता रहे हैं। पिछले सप्ताह हुए ब्लैकआउट के दौरान, 96 लाख की आबादी वाले इस द्वीप पर बिजली बहाल करने में 24 घंटे से अधिक का समय लगा था, जबकि बाहरी प्रांतों में तो स्थिति कई दिनों तक सामान्य नहीं हो पाई थी। प्रभावित क्षेत्रों में लोग सड़कों पर कचरे के ढेर जलाकर और बर्तनों को पीटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्यूबा दशकों के सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस स्थिति को जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ईंधन नाकेबंदी ने और अधिक गंभीर बना दिया है, जिसका उद्देश्य वहां की कम्युनिस्ट सरकार पर दबाव डालना है। ईंधन की भारी कमी के कारण राष्ट्रीय ग्रिड अधिक संवेदनशील हो गया है और आपातकालीन जनरेटरों का उपयोग करना भी लगभग असंभव हो गया है।
क्यूबा और अमेरिका के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण जनवरी की शुरुआत में अमेरिकी बलों द्वारा वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को उनके घर से उठाकर अमेरिका लाने की घटना है। मादुरो क्यूबा के करीबी सहयोगी रहे हैं, और इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरियां और तीखी हो गई हैं, जिसका सीधा असर क्यूबा की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।