नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद निवेशकों को आर्थिक सुधार और बाजार में तेजी की उम्मीद थी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट रही है। पिछले 5 महीनों में नेपाली शेयर बाजार लगातार दबाव में है। बालेन शाह की अगुवाई वाली नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद से अब तक नेपाल स्टॉक एक्सचेंज (NEPSE) इंडेक्स में 380 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
📊 आंकड़ों में गिरावट: 73 दिनों में 47 दिन रहा बाजार लाल
शाह सरकार के कार्यकाल के दौरान अब तक के 73 ट्रेडिंग दिनों में से 47 दिन बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ है, जबकि सिर्फ 26 दिन ही तेजी देखने को मिली। सोमवार को बाजार 2,580 अंकों के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को तोड़ते हुए 2,570.28 अंकों पर बंद हुआ, जो पिछले 6 महीनों से अधिक का निचला स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में इस समय बिकवाली का दबाव भारी है।
💸 निवेशकों को 600 अरब रुपये का नुकसान
नेपाल के शेयर बाजार की निराशाजनक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 26 मार्च, 2026 को जो NEPSE इंडेक्स 2,950.50 के स्तर पर था, वह गिरकर 2,570.28 पर आ गया है। इस दौरान बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 5.009 ट्रिलियन रुपये से घटकर 4.416 ट्रिलियन रुपये रह गया है। यानी महज 5 महीनों में निवेशकों की होल्डिंग्स की वैल्यू में करीब 600 अरब रुपये की कमी आई है।
🔍 अनिश्चितता और घटता भरोसा
बाजार में आई इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह सरकारी नीतियों को लेकर निवेशकों में व्याप्त अनिश्चितता और बाजार से जुड़ी घटनाओं की जांच को माना जा रहा है। हालांकि देश में 79.86 लाख डीमैट खाते और 47 लाख ऑनलाइन ट्रेडिंग (TMS) खाते मौजूद हैं, लेकिन इनमें से सक्रिय निवेशकों की संख्या महज 4 लाख के आसपास है।
🏢 लिस्टेड कंपनियों का स्वरूप
नेपाल स्टॉक एक्सचेंज में वर्तमान में 294 कंपनियां लिस्टेड हैं। बाजार में सबसे अधिक प्रभाव बैंकिंग, वित्तीय संस्थानों और इंश्योरेंस कंपनियों का है, जो कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन का 50.7 फीसदी हिस्सा रखती हैं। इसके बाद 17.5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ हाइड्रोपावर सेक्टर दूसरे स्थान पर है। बाजार जानकारों का कहना है कि जब तक राजनीतिक स्थिरता और स्पष्ट आर्थिक नीतियों का स्पष्ट संकेत नहीं मिलता, तब तक निवेशकों का भरोसा पूरी तरह बहाल होना मुश्किल है।