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मोदी की तीन देशों का दौरा अगले सप्ताह

रक्षा और व्यापार के मुद्दे पर मुख्य ध्यान है भारत का

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले सप्ताह होने वाली तीन देशों (इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) की आधिकारिक यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में सक्रिय सिख अलगाववादियों और चरमपंथियों का मुद्दा प्रमुखता से उठने की उम्मीद है। नई दिल्ली इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है कि इन देशों का आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद पर भारत जैसा ही सख्त रुख है।

प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) रुदेंद्र टंडन ने शुक्रवार को एक विशेष ब्रीफिंग में कहा, हमारे सभी अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में, चाहे वे बहुपक्षीय हों या द्विपक्षीय, यह रिकॉर्ड पर है कि हम आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद [सिख उग्रवाद सहित] के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हैं। उन्होंने आगे कहा, हमारा मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को लगातार यह याद दिलाना आवश्यक है कि आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बने हुए हैं।

टंडन ने जोर देकर कहा, हमें बार-बार यह दोहराना होगा कि आतंकवाद मानवता के खिलाफ एक अपराध है। इन विषयों पर हम अपने करीबी सहयोगियों सहित हर मंच पर चर्चा करते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि जिन देशों की यात्रा पर प्रधानमंत्री जा रहे हैं, वे भी आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद पर समान रूप से कड़ा दृष्टिकोण रखते हैं।

6 जुलाई से शुरू होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की इस त्रिकोणीय यात्रा के दौरान सुरक्षा चर्चाओं के शीर्ष पर रहने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नई दिल्ली से जकार्ता (इंडोनेशिया) के लिए रवाना होंगे, जहाँ वे 7 और 8 जुलाई को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे। इसके बाद वे मेलबर्न के लिए रवाना होंगे। यात्रा का ऑस्ट्रेलियाई चरण 8 जुलाई से शुरू होगा, जिसमें तीसरा भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन शामिल है। इस दौरान पीएम मोदी मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर एक स्पोर्ट्स शोकेस भी देखेंगे और खिलाड़ियों के साथ बातचीत करेंगे। इसके बाद भारतीय नेता 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे और भारत लौटने से पहले 11 जुलाई को अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सटन के साथ बैठक करेंगे।