ग्रेट निकोबार में अपने फायदा के लिए पर्यावरण आपदा ला रहे
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देश के पर्यावरण मंत्री रह चुके हैं
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पूर्व के पत्राचारों का खुलासा किया
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इसके अत्यंत विनाशकारी प्रभाव
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ग्रेट निकोबार में पर्यावरणीय आपदा की ओर लगातार कदम बढ़ाने का आरोप लगाया और कहा कि इस समय देश की पारिस्थितिक चेतना (इकोलॉजिकल कॉन्शियस) दांव पर है। ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के खिलाफ अपना विरोध तेज करते हुए, पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पिछले कुछ वर्षों में इस परियोजना और इसके जैव-विविधता से समृद्ध अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभावों को लेकर अपने व्यापक सार्वजनिक प्रयासों को साझा किया।
रमेश ने कहा, ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना और इसके विनाशकारी प्रभावों पर पिछले कुछ वर्षों में मेरे द्वारा किए गए सार्वजनिक प्रयासों को जानने में लोगों की रुचि रही है। यहाँ मेरे सोशल मीडिया पोस्ट, संसद में दिए गए कुछ संक्षिप्त बयानों, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से, विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों को लिखे गए पत्रों तथा उनके जवाबों का एक संकलन दिया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि जब तक प्रधानमंत्री ग्रेट निकोबार में पर्यावरणीय तबाही की ओर अपनी यात्रा जारी रखेंगे, तब तक इस तरह के जन-प्रयास और विरोध निश्चित रूप से आगे भी होते रहेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि जागरूक नागरिकों और नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) समूहों द्वारा कलकत्ता उच्च न्यायालय में इस परियोजना के खिलाफ पांच अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं।
याचिकाओं का विवरण देते हुए रमेश ने बताया कि इनमें कैंपबेल बे नेशनल पार्क के संबंध में इको-सेंसिटिव जोन अधिसूचना के उल्लंघन, गालाथिया नेशनल पार्क के संबंध में इको-सेंसिटिव जोन अधिसूचना के उल्लंघन और वन अधिकार अधिनियम, 2006 तथा इसके नियम, 2008 के उल्लंघनों को चुनौती दी गई है। इसके अलावा, कलकत्ता हाईकोर्ट में तटीय क्षेत्र विनियमन अधिसूचना, 2019 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उल्लंघन तथा 16 फरवरी, 2026 के राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश को विभिन्न आधारों पर चुनौती देने वाली याचिकाएं भी शामिल हैं।