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सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो गहन जांचः वेणुगोपाल

राम मंदिर  चंदा चोरी पर सीधे प्रधानमंत्री को पत्र लिखा

  • लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है

  • एक संगठित रैकेट काम कर रहा था

  • पहले की चेतावनी को अनसुना किया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अयोध्या के राम मंदिर के दान में कथित वित्तीय हेराफेरी का मुद्दा उठाया है। उन्होंने इस पूरे मामले को चंदा चोरी मेगा घोटाला करार देते हुए इसकी तत्काल सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है।

पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि सैकड़ों करोड़ रुपये के इस बड़े स्तर के धोखाधड़ी के आरोप हिंदू आस्था, धर्म और जीवन शैली के साथ एक स्मारक विश्वासघात हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव वेणुगोपाल, जो संसद की महत्वपूर्ण लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने पत्र में लिखा, भगवान राम को न्याय और धार्मिकता के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। इस प्रकार के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करने के बजाय उन्हें दबा देना, उनके भक्तों और उनके मूल्यों के साथ गहरा अन्याय होगा।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्राथमिक जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की नाक के नीचे एक बेहद संगठित रैकेट काम कर रहा था। उन्होंने इसे संस्थागत शह का नतीजा बताते हुए कहा कि एक तरफ जहां काउंटिंग स्टाफ ने रोजाना नकदी और कीमती आभूषणों की चोरी की, वहीं दूसरी तरफ इस आपराधिक कृत्य को छिपाने के लिए 7 से 8 महीने के महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर नष्ट कर दिया गया। यह दर्शाता है कि इसमें कुछ निचले कर्मचारियों के बजाय उच्च स्तर के लोग भी शामिल हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ट्रस्ट के पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी ने 2020-21 में ही इन अनियमितताओं और बिना हिसाब-किताब के सोने-चांदी के आभूषणों की हेराफेरी को लेकर आगाह किया था, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 जून को गठित विशेष जांच दल (SIT) और 25 जून को दर्ज की गई एफआईआर को दिखावा बताते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि अब तक केवल ड्राइवर, क्लर्क और कैशियर जैसे छोटे लोगों को ही गिरफ्तार किया गया है, जबकि बड़े प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है। चूंकि यह ट्रस्ट भारत सरकार द्वारा 2020 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनाया गया था, इसलिए इसकी जवाबदेही भी सर्वोच्च स्तर पर होनी चाहिए।