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भारतीय नौसेना की कार्रवाई से भाग निकले सभी

भारत के लिए माल ले जा रहे जहाज को समुद्री डाकुओं ने घेरा

  • आईएनएस त्रिकंड का ऑपरेशन था यह

  • अदन की खाड़ी में घिरा था जहाज

  • नौसेना के मॉरकोस कमांडो भी थे

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड ने बुधवार देर रात अदन की खाड़ी के पास मर्चेंट वेसल (व्यापारिक जहाज) एमवी गोल्डन आर्सेनल पर हुए समुद्री डकैती के एक बड़े हमले को नाकाम कर दिया है। सरकारी सूत्रों ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की।

इस हमले का शिकार हुए जहाज एमवी गोल्डन आर्सेनल पर चालक दल का एक भारतीय सदस्य भी सवार था। सूत्रों के अनुसार, जब जहाज पर हमला हुआ, तब चालक दल ने एक सुरक्षित स्थान (सिटाडेल) में शरण ली और आपातकालीन चैनल पर संकट का संकेत (डिस्ट्रेस सिग्नल) प्रसारित किया। क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना के समर्पित एंटी-पायरेसी बल को तुरंत सतर्क किया गया और उन्होंने तेजी से मोर्चा संभाला। जैसे ही नौसेना का युद्धपोत मर्चेंट शिप के करीब पहुंचा, समुद्री डाकू वहां से भाग खड़े हुए।

इसके बाद, जहाज पर किसी भी हथियारबंद घुसपैठिए की मौजूदगी की जांच करने के लिए नौसेना के घातक मरीन कमांडो एमवी गोल्डन आर्सेनल पर उतरे और एक व्यापक सैनिटाइजेशन ऑपरेशन चलाया। जहाज को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करने और चालक दल की मेडिकल जांच करने के बाद, गोल्डन आर्सेनल को अपने गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया।

यह पहली बार नहीं है जब इस युद्धपोत ने ऐसी मुस्तैदी दिखाई है। इससे पहले 19 जून को भी इसी युद्धपोत ने पश्चिमी हिंद महासागर में एमवी फरीदा 5 से मिले संकट के संकेत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए समुद्री डाकुओं को खदेड़ा था। नौसेना ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया था कि आईएनएस त्रिकंड की समय पर की गई इस कार्रवाई से व्यापारिक जहाज की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

इसी तरह, बीती 27 मई को भी आईएनएस कोलकाता ने पश्चिमी हिंद महासागर में ही मर्चेंट वेसल एमवी माशाल्लाह 1 के पास एक संदिग्ध पायरेसी प्रयास को विफल किया था। क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा भागीदार और फर्स्ट रिस्पॉन्डर होने के नाते, भारतीय नौसेना समुद्री नौवहन की सुरक्षा, पायरेसी का मुकाबला करने और सुरक्षित समुद्र सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।