सीआरपीएफ के डीआईजी निलंबित किये गये
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सीएपीएफ विधेयक पर बोल गये थे वहग
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सोशल मीडिया पर जारी हुआ था मुद्दा
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सरकार को बदलने का आह्वान किया था
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने हाल ही में पारित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक के विरुद्ध कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री साझा करने के आरोप में एक वरिष्ठ डीआईजी रैंक के अधिकारी को निलंबित कर दिया है। 10 लाख जवानों वाले इन बलों में लगभग 15,000 कैडर अधिकारी नेतृत्व की भूमिका निभाते हैं, और यह इस तरह का पहला मामला है जब किसी इतने वरिष्ठ अधिकारी पर कार्रवाई की गई है।
निलंबित अधिकारी की पहचान त्रिपुरा सेक्टर मुख्यालय, अगरतला में तैनात डीआईजी बी.सी. पात्रा के रूप में हुई है। 1994 बैच के इस अधिकारी को सीसीएस(सीसीए) नियम, 1965 के तहत प्रारंभिक जांच लंबित रहने तक निलंबित किया गया है। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसी ऑडियो-विजुअल और चित्रमय सामग्री साझा की, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 के पारित होने के दौरान देश की कानूनी रूप से चुनी गई सरकार को बदलने का आह्वान किया गया था। यह विधेयक अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिनियम बन चुका है।
सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि बल का हर वर्दीधारी अधिकारी नियमों, कानूनों और शपथ से बंधा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शपथ या नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी कृत्य से कानून के अनुसार ही निपटा जाएगा। वहीं दूसरी ओर, इस मामले से जुड़े कई अधिकारियों ने इस निलंबन को दुर्भावनापूर्ण और अनुचित करार दिया है। उनका तर्क है कि डीआईजी पात्रा को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने पदोन्नति और सेवा समानता के मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी।
कैडर अधिकारियों का आरोप है कि उन्हें भारतीय पुलिस सेवा के प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों के बराबर अधिकार नहीं मिल रहे हैं, जिसके कारण उनकी प्रगति रुक गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल इस संबंध में निर्देश जारी किए थे, लेकिन सरकार ने उसके खिलाफ अपील की जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि सीएपीएफ में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति एक वैध आवश्यकता है। इस बीच, पूर्व-सीएपीएफ अधिकारियों के एक संगठन ने डीआईजी के निलंबन को अवैध बताते हुए 2 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का फैसला किया है।