आपातकालू लागू करने के बाद विरोध प्रदर्शनों को दबाने की योजना
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छह सप्ताह से वहां जारी है आंदोलन
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समाज के कई वर्गों का समर्थन है
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अब तक चौदह लोगों की जान गयी
एजेंसियां
लॉ पॉजः दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र बोलिविया इस समय एक गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले कई हफ्तों से जारी वामपंथी विरोध प्रदर्शनों ने देश की अर्थव्यवस्था और जनजीवन को पूरी तरह से ठप कर दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज़ ने शनिवार को देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है और सड़कों पर मास्कधारी सैनिकों की टुकड़ियों को तैनात कर दिया है।
पिछले छह सप्ताह से चल रहे इस आंदोलन को श्रमिक संघों, स्वदेशी समूहों और कोका किसानों का व्यापक समर्थन प्राप्त है। इन प्रदर्शनों के कारण पूरे देश में ईंधन, भोजन और आवश्यक दवाओं की भारी किल्लत पैदा हो गई है। बोलिविया के लोकपाल कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 1 मई से अब तक इन हिंसक झड़पों और अव्यवस्था में कम से कम 14 लोगों की जान जा चुकी है।
प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा हिस्सा देश के पूर्व समाजवादी राष्ट्रपति इवो मोरालेस का समर्थक है। इन्होंने देशभर में मुख्य सड़कों को मलबे, लकड़ियों और बड़े पत्थरों से जाम कर दिया है, जिससे परिवहन व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध सरकार द्वारा ईंधन सब्सिडी को खत्म करने और उन भूमि सुधार योजनाओं के खिलाफ है, जिनका आरोप है कि ये नीतियां बड़े भूस्वामियों को छोटे किसानों की जमीनें हड़पने में मदद करेंगी। इस राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता के कारण बोलिविया की अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है।
राष्ट्र के नाम एक टेलीविजन संबोधन में राष्ट्रपति पाज़ ने स्पष्ट किया कि यह कठोर कदम देश की सड़कों को मुक्त कराने के लिए आवश्यक था। उन्होंने कहा, बोलिविया के नागरिक उन नाकेबंदियों के बंधक बनकर नहीं रह सकते जो लोगों को काम करने, पढ़ने, चिकित्सा सुविधाएँ प्राप्त करने और अपने घरों तक राशन पहुँचाने से रोक रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का एकमात्र उद्देश्य देश में सामान्य स्थिति बहाल करना है, क्योंकि कुछ संगठित समूह हिंसा का उपयोग करके देश को पंगु बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्रपति के इस संबोधन के कुछ ही घंटों बाद, बोलिविया के दूसरे सबसे बड़े शहर एल ऑल्टो में सैनिकों और सशस्त्र पुलिस के काफिले को तैनात होते देखा गया। बुलडोजर की मदद से प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए अवरोधों को हटाया गया। गौरतलब है कि पिछले महीने ही राष्ट्रपति पाज़ ने एक कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जो सैन्य बलों को आंतरिक संघर्षों में हस्तक्षेप करने का अधिकार देता है। उन्होंने इसे एक अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की बात कही थी।