इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी से ही साहस सीख लेते
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मुलाकात के बाद भी साफ नहीं बोल पाये
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इटली की पीएम ने स्पष्टता से बात रखी
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ऑपरेशन सिंदूर के वक्त से अजीब हाल
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हालिया जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात को लेकर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारतीय नाविकों की मौत, एकतरफा अमेरिकी व्यापार समझौते और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े संघर्ष विराम के दावों जैसे गंभीर मुद्दों पर कड़ा रुख नहीं अपनाया।
पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ प्रतिक्रिया देने के मामले में इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से सीख लेनी चाहिए। खेड़ा ने कटाक्ष करते हुए कहा, नरेंद्र मोदी इंदिरा गांधी जी से नहीं सीखना चाहते, तो कम से कम जॉर्जिया मेलोनी जी से ही सीख लें कि आंख में आंख डालकर जवाब कैसे दिया जाता है।
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान पलाऊ-ध्वज वाले तेल टैंकर पर हमले में तीन भारतीय नाविकों (आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश) की मौत हो गई थी। अमेरिका ने टैंकर पर ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। इस घटना पर विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई थी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने यह मुद्दा उठाया था। हालांकि, मोदी ने बैठक में नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा रखा, लेकिन ट्रंप की प्रतिक्रिया को संक्षिप्त और टालने वाला माना गया।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में तनाव बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय निर्यात पर भारी शुल्क लगाया है। हालांकि दोनों देशों ने पहले चरण के समझौते के करीब होने का दावा किया है, लेकिन पवन खेड़ा का आरोप है कि मोदी ने व्यापार समझौते की एकतरफा प्रकृति का कड़ा विरोध नहीं किया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया कि व्यापार समझौता बैठक की प्राथमिकता थी, क्योंकि इसने पिछले एक साल में अनिश्चितता पैदा की है।
पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद हुए संघर्ष विराम को लेकर ट्रंप द्वारा किए गए दावों पर भी विवाद है। भारत ने स्पष्ट किया है कि शत्रुता को समाप्त करने का निर्णय भारत और पाकिस्तान के बीच सीधा था, न कि अमेरिकी मध्यस्थता के कारण।
ब्रिक्स पर ट्रंप की टिप्पणी: ट्रंप ने बार-बार ब्रिक्स समूह की आलोचना की है और इसे अमेरिकी डॉलर के लिए खतरा बताया है। खेड़ा का आरोप है कि इस पर भी मोदी कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। दूसरी ओर, भारत ने आधिकारिक रूप से ब्रिक्स के भीतर डी-डॉलरकरण के एजेंडे को खारिज किया है और एक संयमित रुख अपनाया है। कांग्रेस के इन आरोपों के बावजूद, सरकार का कहना है कि जी7 जैसी बैठकों में समय की कमी होती है और सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा संभव नहीं होती। सरकार ने दोहराया कि भारत के राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और इन मंचों का उपयोग देश के पक्ष को मजबूती से रखने के लिए किया गया है।