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इंग्लैंड का ऐतिहासिक मेजर ओक वृक्ष अब मृत

प्रसिद्ध रॉबिन हुड की कहानियों में भी इस पेड़ का उल्लेख है

  • प्राचीन इतिहास की विरासत का हिस्सा था

  • करीब बारह सौ वर्ष इसकी उम्र आंकी गयी थी

  • पहली बार इसमें अब पत्तियां नहीं आयी है

एजेंसियां

लंदनः इंग्लैंड के नॉटिंघमशायर स्थित शेर्वुड फ़ॉरेस्ट में खड़ा, लगभग 1,200 वर्ष पुराना मेजर ओक अब हमारे बीच नहीं रहा। यह पेड़ केवल एक वनस्पति नहीं था, बल्कि इतिहास का एक जीवंत साक्षी था। गुरुवार, 18 जून को रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड्स ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि इस वसंत में पेड़ में पत्तियां नहीं आई हैं, जो इसके अंत का सूचक है।

यह वृक्ष सदियों से ब्रिटिश लोककथाओं का केंद्र रहा है। सबसे प्रचलित किंवदंती के अनुसार, यह वही विशाल पेड़ है जिसने 13वीं शताब्दी के महान नायक रॉबिन हुड और उनके साथियों को आश्रय प्रदान किया था। रॉबिन हुड, जिसे अमीरों से लूटकर गरीबों में बांटने और नॉटिंघम के शेरिफ को चकमा देने के लिए जाना जाता है, का नाम इस पेड़ के साथ अटूट रूप से जुड़ा था। पीढ़ियों तक, यह पेड़ न केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए, बल्कि इतिहास और कहानियों में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा है।

मानवीय और पर्यावरणीय प्रभाव मेजर ओक के इस दुखद अंत के पीछे कई कारण उत्तरदायी हैं। आरएसपीबी की प्रतिनिधि हॉली ड्रेक ने इसे सभी के लिए हृदय विदारक बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले दो शताब्दियों में पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण पेड़ के आसपास की मिट्टी अत्यधिक कठोर हो गई थी। अत्यधिक मानवीय चहल-पहल से मिट्टी दब गई, जिसके चलते वर्षा का जल जड़ों तक नहीं पहुँच सका और पेड़ धीरे-धीरे पोषक तत्वों के अभाव में दम तोड़ने लगा।

इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी और लंबे समय तक चलने वाले सूखे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। वर्षों से, पेड़ की भारी-भरकम और फैली हुई शाखाओं को सहारा देने के लिए लगाए गए धातु के खंभे और केबल भी अंततः इसे बचाने में विफल रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, जड़ प्रणाली पूरी तरह से घुट गई थी।

मेजर ओक का जाना केवल एक पेड़ का गिरना नहीं है, बल्कि यह उस युग का अंत है जिसने साम्राज्यों को बनते-बिगड़ते और राजाओं को आते-जाते देखा। इसने एक सहस्राब्दी से अधिक समय तक अपनी छाया में इतिहास को संजोकर रखा था। अब, यह केवल किताबों और स्मृतियों में ही जीवित रहेगा।