Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
हाईड्रोजन टरबाइन से बिजली का उत्पादन किया वार्ता के दौरान ही इजरायल का लेबनान पर हमला डैन्यूब नदी का पानी घटने पर हंगरी के सामने ऊर्जा संकट राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में आतंकी हमला हो सकता है केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा हालात सामान्य होने में वक्त लगेगा जबलपुर: मुंह के कैंसर ऑपरेशन में भारी चूक! गाल के अंदर डॉक्टर ने लगाई ठुड्डी की स्किन, पीड़ित ने लगा... राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम को झटका आसाराम की अंतरिम जमानत सुप्रीम कोर्ट में रद्द सदन में बयान दें और माफी मांगे अमित शाहः खडगे हैदराबाद से पैदल चलने के तनाव में बेकाबू हुआ था हाथी! इंदौर पुलिस की कार्रवाई, महावत गिरफ्तार

India vs China Steel Market: स्टील सेक्टर में भारत की नई ग्रोथ स्टोरी; मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर टिकी नजरें

विवरण: दो दशकों तक चीन के शहरीकरण ने ग्लोबल स्टील इंडस्ट्री को दिशा दी, लेकिन अब माइनिंग कंपनियों और स्टील दिग्गजों की नजरें भारत पर टिकी हैं। बीएचपी और रियो टिंटो जैसे वैश्विक खिलाड़ी भारत को मांग का अगला बड़ा केंद्र मान रहे हैं। हालांकि, भारत का विकास चीन के ‘प्रॉपर्टी बूम’ मॉडल से पूरी तरह अलग है।

📊 खपत में फासला: ग्रोथ की अपार संभावनाएं

भारत में प्रति व्यक्ति स्टील की खपत मात्र 108 किलोग्राम है, जो ग्लोबल औसत (215 किलोग्राम) से आधी और चीन (601 किलोग्राम) की तुलना में बहुत कम है। सरकार का लक्ष्य आने वाले दशकों में क्रूड स्टील उत्पादन को तेजी से बढ़ाना है। पीडब्ल्यूसी इंडिया के विनोद कुमार के अनुसार, भारत की यह वृद्धि चीन की नकल नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित टिकाऊ विकास होगी।

🏗️ अपार्टमेंट नहीं, मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना प्राथमिकता

चीन की स्टील मांग का मुख्य आधार रिहायशी निर्माण (Real Estate) था, जबकि भारत का ध्यान “मेक इन इंडिया” के तहत फैक्ट्रियां, ऑटोमोबाइल, और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट पर है। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास (हाईवे, पोर्ट, एयरपोर्ट) स्टील की मांग का 60%-65% हिस्सा संभाल रहा है। इससे भारत की स्टील मांग का पैटर्न चीन से अधिक विविधतापूर्ण (Diversified) होगा।

🚧 ग्रोथ की राह में चुनौतियां

भारत की राह आसान नहीं है। चीन की तेजी से कैपेसिटी बढ़ाने की क्षमता के विपरीत, भारत में प्रोजेक्ट्स को जमीन अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, मेटालर्जिकल कोल के लिए आयात पर निर्भरता और खदानों की नीलामी की ऊंची लागत घरेलू उत्पादकों पर दबाव डालती है।

🌍 ग्रीन स्टील की ओर बढ़ते कदम

चीन के विपरीत, भारत के पास अपनी स्टील इंडस्ट्री खड़ी करते समय पर्यावरणीय चिंताएं भी हैं। यूरोपीय यूनियन के ‘कार्बन बॉर्डर टैरिफ’ के दबाव में भारत कार्बन उत्सर्जन को प्रति टन 2.65 से घटाकर 2 टन तक लाने का लक्ष्य रख रहा है। स्क्रैप-बेस्ड और गैस-बेस्ड उत्पादन तकनीकों पर जोर यह साबित करता है कि भारत भविष्य में एक ‘ग्रीनर’ स्टील हब बनने की ओर अग्रसर है।