नेपाल के विदेश मंत्री का चीन दौरा
एजेंसियां
बीजिंगः नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने सोमवार को बीजिंग में चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी से मुलाकात की। मार्च में हुए चुनावों में अपनी पार्टी की शानदार जीत के बाद यह खनाल की पहली चीन यात्रा है, जो उनके भारत दौरे के ठीक कुछ दिनों बाद हुई है। यह कूटनीतिक कदम नेपाल की संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है और इसे दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन सरकार का सत्ता से बाहर होना बीजिंग के लिए एक चुनौती है। चीन, जो अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में अपने दावों को लेकर सक्रिय है, अब नेपाल के साथ अपने रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करने के दबाव में है। चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, वांग यी ने कहा कि चीन ने हमेशा नेपाल को अपनी पड़ोसी कूटनीति में प्राथमिकता दी है और वह नेपाल की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में उसका समर्थन करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों के कारण नेपाल को चीन के साथ संबंधों में एक प्रकार का लाभकारी स्थिति प्राप्त होता है। बीजिंग अब उस स्थिति में है जहाँ उसे अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी। हालाँकि, भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर करीब 80 वर्षों से विवाद रहा है, लेकिन मंत्री खनाल ने हाल ही में दिल्ली में स्पष्ट किया कि नेपाल की नई सरकार अतीत के राजनीतिक बोझ से मुक्त है और भारत के साथ संबंधों को सुधारने के लिए तत्पर है।
चीन के साथ नेपाल के संबंधों में मुख्य बाधा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की धीमी प्रगति रही है। 2017 में बेल्ट एंड रोड पहल में शामिल होने के बावजूद, वित्तपोषण संबंधी मतभेदों के कारण परियोजनाएं अटकी हुई हैं। वांग यी ने इस मुलाकात में बिजली उत्पादन, राजमार्ग, बंदरगाह और विमानन क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की चीन की प्रतिबद्धता को दोहराया।
चाइना-ग्लोबल साउथ प्रोजेक्ट के सह-संस्थापक एरिक ओलैंडर के अनुसार, नेपाल में सत्ता परिवर्तन ने बीजिंग को चौंकाया है। उन्होंने कहा कि बीजिंग उन परिवर्तनों को पसंद नहीं करता जो सीधे उसके हितों को चुनौती देते हैं या जिन्हें वह संभावित रूप से प्रतिकूल मानता है। यह दौरा नेपाल के लिए भारत और चीन के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है।