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देश के कई इलाकों में असामान्य जनसांख्यिकीय बदलाव पर ध्यान

गृह मंत्री अमित शाह ने कमेटी संबंधी निर्देश दिये

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार, को एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उन्होंने गृह मंत्रालय के अधिकारियों को जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने वाली उच्च-स्तरीय समिति को हरसंभव सहायता प्रदान करने का स्पष्ट निर्देश दिया। यह समिति विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों के कारणों की जांच के लिए गठित की गई है। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, सरकार इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीरता से ले रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले वर्ष की गई घोषणा के बाद, इस समिति का औपचारिक गठन 26 मई को किया गया था और इसने 2 जून को अपनी पहली बैठक आयोजित की थी। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर की अध्यक्षता में गठित यह पैनल अब देश के सीमावर्ती जिलों, महानगरीय क्षेत्रों और औद्योगिक नगरों का दौरा करेगा।

समिति का प्राथमिक उद्देश्य अवैध प्रवासन के कारण जनसांख्यिकी में आए बदलावों का गहन विश्लेषण करना है। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समिति का एजेंडा पहले ही तैयार किया जा चुका है और गृह मंत्रालय अब इसे सुचारू रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएगा।

शनिवार को आयोजित इस बैठक में गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो के प्रमुख तपन कुमार डेका, अतिरिक्त सचिव नीलेश कुमार व्यास और भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। श्री नारायण इस समिति के एकमात्र सदस्य हैं जो इस बैठक में शामिल हुए।

ज्ञात हो कि 2 जून को हुई अपनी पहली बैठक में समिति ने यह निर्णय लिया था कि वह 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास के बाद मतदाता सूची से नामों को हटाए जाने के विषय का भी अध्ययन करेगी। इसके लिए समिति ने संबंधित सरकारी विभागों से आवश्यक दस्तावेज भी मांगे हैं।

समिति के कार्यक्षेत्र के अनुसार, इसका जनादेश न केवल अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करना है, बल्कि जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए एक संस्थागत तंत्र की सिफारिश करना भी है। अधिसूचना के अनुसार, पैनल देश में पहले से रह रहे अवैध प्रवासियों की पहचान, उन्हें हिरासत में लेने और समयबद्ध तरीके से निर्वासन के लिए एक सुव्यवस्थित और स्थायी परिचालन प्रणाली के निर्माण का सुझाव भी देगा।

समिति के अन्य सदस्यों में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के पूर्व महानिदेशक और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव, तथा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य शमिका रवि शामिल हैं। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी-I) इस समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह समिति अपनी रिपोर्ट के माध्यम से देश की आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकीय ढांचे को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव दे सकती है।